Breaking News
recent

‘बैठ जाओ, जीते तो समझो आप ही विधायक’

पाली। निर्दलीय ताल ठोकने वाले प्रत्याशियों से मान-मनौव्वल का दौर बुधवार को भी जारी रहा। प्रमुख दलों के प्रत्याशी और उनके समर्थक चुनाव मैदान में खम ठोक रहे प्रत्याशियों से समर्थन बटोरने की जुगत करते रहे। जिन जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीत के आड़े आ रहे हंै वहां कुछ ज्यादा ही मनुहार की जा रही है। ऐसे में निर्दलीय भी अपना वजूद दिखाने पर अडिग हैं। हालांकि कुछ जगह नामांकन वापसी हो चुकी है, लेकिन अधिकतर निर्दलीय अब भी मैदान में हैं।
बागी प्रत्याशियों को किसी भी तरीके से अपने खेमे में वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। बागियों को यहां तक कहा जा रहा है कि आप नामांकन वापस ले लो, जीतने के बाद समझो आप ही विधायक हो।

नाम वापसी का अंतिम दिन आज
विधानसभा आम चुनाव के लिए नाम वापसी के प्रथम दिन जिले में चार प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए।
वहीं, गुरुवार को नाम वापसी का अंतिम दिन होगा। इस दौरान कोई भी उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र वापस ले सकता है। जिले के विधानसभा क्षेत्र मारवाड़ जंक्शन से निर्दलीय उम्मीदवार हरिराम चौधरी व पेमाराम चौधरी ने नामांकन पत्र वापस लिया है। इसी प्रकार पाली विधानसभा क्षेत्र से ईश्वरलाल (आप) ने तथा सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र से चन्दनसिंह निर्दलीय ने अपना नामांकन पत्र वापस लिया है। इसके अलावा जिले की जैतारण, सोजत एवं बाली विधानसभा क्षेत्र से किसी भी उम्मीदवार ने अपना नाम वापस नहीं लिया है।

प्रमुख दलों को नुकसान पहुंचा रहे बागी
चुनावी मैदान में निर्दलीय प्रत्याशियों के खम ठोकने से अक्सर प्रमुख राजनीतिक दल नुकसान झेलते हैं। कई बार दलों से जुड़े पदाधिकारी बागी बनते हुए नामांकन जमा करवा लेते हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर दल से जुड़े प्रत्याशी को झेलना पड़ता है। नुकसान कम करने के लिहाज से एेसे प्रत्याशियों की मनुहार करनी पड़ती है। बागी प्रत्याशियों को मनाने के खासतौर से प्रयास हो रहे हैं। राजनीतिक दलों में प्रदेश स्तरीय नेताओं से दबाव भी दिलाया जा रहा है। चुनाव के बाद उनकी उम्मीद के मुताबिक कार्य किए जाने के वादे किए जा रहे हैं।

सियासत : पहनावा बदला, बदल गया रंग-ढंग
पाली. विधानसभा चुनाव के नामांकन भरने का काम पूरा होने के बाद अब प्रत्याशियों ने प्रचार और जनसम्पर्क में ताकत झौंक दी है। प्रत्याशियों ने अपने चुनावी कार्यालय खोल दिए हैं। कार्यालयों को बैनर व झंडों से पाट दिए है। शहर की आबो-हवा में भी सियासी रंग घुल रहा है। चौराहे, चौपालों, दफ्तरों व गली मोहल्लों में सिर्फ चुनावी चर्चाएं चल रही है। विशेष कर चाय की थडि़यों पर लोग दिनभर प्रत्याशियों के हार जीत के गणित पर बात कर रहे हैं।
सियासत को भाया जैकेट
सर्दी के असर को देखते हुए नेता और कार्यकर्ता कुर्ता-पायजामा के साथ जैकेट पहने देखे जा रहे हैं। वहीं कुर्ता पायजामा पर जूतियों की जगह स्पोर्ट शूज का क्रेज ज्यादा है ताकि चलने फिरने में आसानी रहे।

बदल गया पहनावा, चुनावी रंग भारी
विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही नेता हो या कार्यकर्ता सभी के पहनावे में बदलाव आया है। अधिकांश नेता और कार्यकर्ता पेंट शर्ट छोड़ कर कुर्ता-पायजामा पहने नजर आ रहे हैं। यूं तो सभी रंगों के कुर्ता-पायजामा पहना जा रहा है। खासतौर से सफेद कुर्ता पायजामा ज्यादा भा रहा है। रैली और अन्य चुनावी कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग कुर्ता पायजामा पहने दिखाई दे रहे हैं।

गले में पार्टियों के दुपट्टे
बदलते वक्त के साथ अब सिर पर राजनीतिक पार्टियों के रंग की टोपी की जगह गले में दुपट्टे ने ले ली है। भाजपा हो या कांग्रेस सभी अपनी पार्टी के रंग के दुपट्टे धारण किए दिखाई देने लगे हैं।

पहन रहे सिलवाए हुए कपड़े
यूं तो रेडिमेड कपड़ों का जमाना है, लेकिन बात जब सियासत की हो तो टेलर से सिलवाए कपड़ों की मांग ज्यादा है। कई तरह के रंगों के कुर्ता-पायजामा सिलवाए जा रहे हैं। सिले हुए जैकेट की डिमांड भी ज्यादा है। हालांकि, अब कपड़ों की दुकानों पर भी नेताओं के पसंद का ख्याल रखा जा रहा है।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.