चूरू। विकास के नाम पर चुनावी वैतरणी पार लगाने की जुगत में लगे नेता एक बार फिर से वही राग लेकर जनता के बीच में उतर आए हैं। नए-नए वादे कर जनता को लुभाने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन 2013 की स्थिति देखें तो कई ऐसे वादे जनता के समक्ष किए गए जो आज भी अधूरे हैं। विपक्ष के रूप में कांग्रेस की भूमिका कमजोर रही। चूरू इसलिए महत्वपूर्ण है कि यहां पंचायत राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ लंबे समय से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने भी जनता के समक्ष कई वादे किए थे। चूरू की टीस है कि राज में भागीदारी के बावजूद वे आज विकास को तरस रहे हैं।
चूरू को हैरीटेज सिटी के रूप में विकसित करने का वादा अधूरा है। ड्रेनेज योजना की धीमी गति ने जनता को परेशान कर दिया है। इसके अलावा क्षेत्र में हैण्डीक्राफ्ट उद्योग धंधे बंद हो गए। चिकित्सा व्यवस्था भी पूरी तरह से सुधर नहीं पाई है। चूरू के भरतिया अस्पताल में ट्रोमा बर्न यूनिट में शैय्याओं की संख्या बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन ये भी ठंडे बस्ते में है। चूरू में नर्सिंग कॉलेज खोला लेकिन भवन कब बनेगा पता नहीं।
यही नहीं आईवीएफ सेंटर भी सरकार की घोषणा के मुताबिक नहीं खुल पाया है। वादों की अगली कड़ी की बात करें तो चूरू में जन्मजात बीमार बच्चों के लिए अरली डिटेक्शन सेंटर बनाने की घोषणा सरकार ने की थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया है। सरकारी स्कूलों शिक्षकों के पद रिक्त हैं। चूरू शहर में पार्किंग की सुविधा नहीं है। शहर की सफाई व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो पाई है।
क्या थे वादे और क्या हुआ
राजेंद्र राठौड़
चूरू को हैरीटेज सिटी के रूप में विकसित करने का वादा अधूरा।
रिंगरोड पर कार्य नहीं हुआ।
मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण नहीं, पद भी रिक्त।
यमुना का मीठा पानी दिलाने का वादा चूरू और झुंझुनूं को किया था लेकिन ये काम भी गति नहीं पकड़ पाया।
मकबूल मंडेलिया
क्षेत्र में उद्योगों के विस्तार की बात कही लेकिन प्रयास नहीं।
बिजली उत्पादन बढ़ाने पर कोई कार्य नहीं हो सका।
कांग्रेस सरकार में पीपीपी मोड पर चूरू में मेडिकल कॉलेज की घोषणा करवाई थी।
चूरू अस्पताल को ए-ग्रेड दर्जा दिलाने का वादा पूरा किया।
क्षेत्र का जन एजेंडा
औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार
किसानों को फसल बीमा का पूरा लाभ दिया जाए
खेतों की बाड़ बंदी के लिए कर्ज मिले
सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी
शहर में महिला शौचालयों की सुविधा प्रदान की जाए महिला सुरक्षा को लेकर पुख्ता व्यवस्था की जाए।
राठौड़ बनाम मंडेलिया
राठौड़ पांच साल क्षेत्र में सक्रिय रहे। क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा में रखा भी है। गांवों में लोगों से रुबरू हुए और अधिकारियों से क्षेत्र की समस्याओं का निस्तारण करने के लिए निर्देशित भी किया।
मंडेलिया पांच साल में क्षेत्र की जनता के बीच कम नजर आए। लेकिन जब भी आए जनता से मुखातिब हुए। उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं के निस्तारण के लिए जिला कलक्टर के माध्यम से ज्ञापन दिए। इसके लिए धरने भी दिए।
बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। लघु औद्योगिक इकाईयां लगें, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए विदेश में नहीं जाना पड़े। बंद हुए हैंडीक्राफ्ट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जाएं।
राजकुमार सहारण, युवा
शिक्षण संस्थानों में पद रिक्त हैं। सरकार की ओर से की जा रही भर्तियों में आए दिन धांधली सामने आ रही है। ये प्रमुख मुद्दा है। भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता होनी चाहिए।
अंजली प्रजापत, छात्रा





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