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सिलिकोसिस का दंश: तीस की उम्र में पत्थरों के बीच तोड़ रहे दम, न दुआ काम आ रही और न दवा

 

सिरोही से राजू जाणी

सिरोही. जिले का आबू-पिण्डवाड़ा विधानसभा क्षेत्र। जिले का ये विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के नेता चुनाव से पूर्व आदिवासियों से वादे कर बारी-बारी से जीत रहे हैं, लेकिन यहां के हालात जस के तस ही नजर आ रहे हैं। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा के समाराम गरासिया विधायक चुने गए। पिछले पांच साल में यहां कमोबेश विकास तो हुआ लेकिन अधिकांश वादे धरे रह गए। क्षेत्र के आसपास मौजूद दर्जनों गांव-फलिया। यहां के अधिकांश लोग पत्थर घिसाई के काम से जुड़े हुए हैं और इनके तीसरे घर-परिवार ने सिलिकोसिस नामक बीमारी से जवान बेटा-बाप, ***** या बहू कम उम्र में ही खोई है। कारण कि इस बीमारी का कोई कारगर इलाज नहीं है। यानी लाइलाज है। इसे लाचारी कहे या परिवार पालने की मजबूरी लेकिन सबसे बड़ी सच्चाई है कि पत्थरों के बीच काम करते हुए तीस-चालीस साल की उम्र में दम तोड़ रहे हैं।
मैं सिरोही से पिण्डवाड़ा पहुंचा और बस स्टैंड पर उतरकर बाजार की ओर चलने लगा तो सड़क और नालियों का नजारा देखकर कदम ठिठक गए। रोडवेज बस स्टैंड पर भी यात्री सुविधाओं का अभाव नजर आया। शहर की गलियों में खस्ताहाल सड़केें और टूटी नालियां। इतना ही नहीं सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण। इसके बाद बसस्टैंड से करीब एक किलोमीटर दूर राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय पहुंचा तो यहां और भी बुरे हाल नजर आए। ना यहां पर्याप्त चिकित्सक है और ना ही अन्य कार्मिक। बातचीत करने पर पता चला कि यहां महज दो चिकित्सक है। इनमें भी एक चिकित्सक के पास बीसीएमओ का कार्यभार है। ऐसे में महज एक चिकित्सक के भरोसे सीएचसी का संचालन हो रहा है। ऐसे में लोगों को मजबूरी में दूसरी जगहों पर इलाज करवाना पड़ रहा है।

....और यहां सांसों में जमती मौत
इसके बाद पत्थरों की मीनाकारी के लिए प्रसिद्ध कारीगरों की बस्ती में पहुंचा। हालात भयावह नजर आए। यहां के अधिकांश घरों में कम उम्र की महिलाएं विधवा है। कई घरों में नौजवान भी खाट पर पड़े हैं। इसकी वजह है सिलिकोसिस बीमारी। यहां के लोग सड़क, स्कूल और पानी जैसी सुविधाओं की नहीं बल्कि ऐसे अस्पताल के स्थापना की आस करते हैं, जिससे सिलिकोसिस से होने वाली मौत का सिलसिला थम जाए। पिण्डवाड़ा शहर में करीब छह वार्डों में सिलिकोसिस का कहर है। यहां के वार्ड संख्या 1 व 2 के अलावा 12, 14, 17, 19 और 20 के अधिकांश घरों में सिलिकोसिस के बीमार है।

ये थे मुख्य वादे
िपछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी समाराम गरासिया की ओर से कईवादे किए गए थे। जिसमें पिण्डवाड़ा में राजकीय महाविद्यालय खोलने, सेई बांध का पानी कादम्बरी बांध में डालने और क्षेत्र में शिक्षा का स्तर सुधारने को लेकर मुख्य रूप से वादा किया गया था। लेकिन सेई बांध का पानी कादम्बरी बांध में लाने को लेकर पांच साल में कोईप्रयास नहीं किए गए। वहीं पिण्डवाड़ा में सरकारी कॉलेज की स्वीकृति तो मिल गई, लेकिन जमीन विवाद के चलते भवन नहीं बन पायाहै। कांग्रेस प्रत्याशी गंगाबेन गरासिया ने बेहतर सड़कें, रोजगार के साधन मुहैया कराने समेत कई वादे किए, लेकिन पराजित होने से कार्य नहीं करा पाईं।

समाराम गरासिया बनाम गंगाबेन गरासिया
क्षेत्र से विधायक समाराम गरासिया है। वे क्षेत्र में सक्रिय रहे। पिछले महीनों इनका एक टै्रक्टर बजरी खनन करते पकड़ा गया। जनता में चर्चा रही कि विधायक ही ऐसा करेंगे तो आमजन की सेवा कैसे होगी। इसी तरह पिछले चुनाव में प्रतिद्वंद्वी रही कांग्रेस की गंगाबेन गरासिया जनता के बीच कोई खास सक्रिय नजर नहीं आई। हालांकि जिलाध्यक्ष रहते कुछेक कार्यक्रमों में जरूर देखी गई लेकिन विपक्ष के तौर पर कोई भूमिका सामने नहीं आई।

ये प्रमुख समस्याएं
माउंट आबू में बिल्डिंग बायलॉज
चिकित्सालय में कार्मिकों के पद रिक्त
अवैध खनन
अतिक्रमण की भरमार
शहर व गांवों में बदहाल सड़कें व नालियां
किसानों की उपज खरीद के लिए केन्द्र का अभाव

क्षेत्र के जनता की जुबानी
पिछले चुनाव के दौरान आमसभा में वसुंधरा राजे ने भाजपा की सरकार बनने पर सेई बांध का पानी कादम्बरी में लाने का वादा किया था, लेकिन विधायक व सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया। इसके अलावा क्षेत्र में सरकारी भूमि अतिक्रमण की चपेटमें हैं, लेकिन कोई कार्रवाईनहीं हो रही है। जनता हितों के साथ कुठाराघात हुआ है।
-कांशीराम रावल, पिण्डवाड़ा

&पिण्डवाड़ा क्षेत्र में सिलिकोसिस के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन चिकित्सा विभाग के पास ऐसे मरीजों के स्वास्थ्य जांच को लेकर पर्याप्त संसाधन तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सिलिकोसिस के रोग तिल-तिल कर मर रहे हैं। लेकिन सरकार इस बीमारी को लेकर भी गंभीर नहीं है। वहीं युवाओं को रोजगार देने में भी सरकार नाकाम रही है।
-अभयसिंह काबा, पिण्डवाड़ा

&कच्ची बस्तियों में गन्दगी के ढेर लगे हुए हैं। लोग आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर है। नालियों का पानी सड़कों पर फैल रहा है। अधिकांश वार्डों में सड़कें खस्ताहाल है। जबकि पिछले चुनाव में भाजपा ने पिण्डवाड़ा को स्मार्टसिटी बनाने का वादा किया गया था।
-जाकिर हुसैन, पिण्डवाड़ा
&उपखंड मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय खोलने का वादा किया था। हालांकि, चुनावी साल में महाविद्यालय को स्वीकृति मिल गई, लेकिन जमीन विवाद के चलते अस्थाई भवन में संचालित हो रहा है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर भी आमजन परेशान है।
-नारायण सोनी, पिण्डवाड़ा

वर्ष 2013 के चुनाव का परिणाम
61453
भाजपा- समाराम गरासिया

30598
कांग्रेस- गंगाबेन गरासिया

30855
जीत का अंतर-



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