जैसलमेर. दिवाली के दूसरे दिन सुबह गोवद्र्धन पूजा और रामा-श्यामा का दौर चला। इस दिन लोगों ने दीपोत्सव की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया और बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया। दुर्ग के लक्ष्मीनाथजी के मंदिर में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग दर्शनार्थ पहुंचे। इससे पूरे दुर्गक्षेत्र में सुबह से दोपहर तक टे्रफिक जाम की स्थितियां बनती रही। यातायात पुलिस को यातायात सुगम बनाने में खूब पसीना पहाना पड़ा।
शहर की अधिकांश दुकानें बंद रही, वहीं घरों में दीपावली की शुभकामनाएं देने आने वाले लोगों के कारण दिनभर चहल-पहल का आलम था।वैष्णव मंदिरों में गोवद्र्धन पूजन के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महिलाओं ने बड़े सवेरे अपने घर के बाहर गोवद्र्धन पूजन किया।मंदिरों में दोपहर के समय अन्नकूट उत्सव मनाया गया।
सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बौछार
लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय फेसबुक और वाट्सएप जैसे सोशल मीडिया के ठिकानों पर दिवाली के दूसरे दिन त्योहार की शुभकामनाओं की मानो बहार छाई रही। हर आयुवर्ग के लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने संबंधियों व मित्रों को चाहे वे दूर रहते हों या पास, शुभकामनाएं प्रेषित की। युवाओं का तो पूरा दिन इस तरह से व्यतीत हुआ।सोशल मीडिया के प्रभाव से ग्रीटिंग कार्ड व मोबाइल पर एसएमएस भेज कर दीपावली की शुभकामनाएं देने वालों में खासी कमी आई है।
सैलानियों ने भी उमंग के साथ मनाई दिवाली
जैसलमेर. दिवाली के प्रकाश पर्व ने जैसलमेर भ्रमण पर आए घरेलू सैलानियों के साथ सात समंदर पार से आए अलग सभ्यता व संस्कृति वाले विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित किया। इन सैलानियों ने स्थानीय लोगों के साथ व आपास में मिलकर न केवल आतिशबाजी की बल्कि कुछ विदेशी सैलानियों ने लक्ष्मी पूजन की सामग्री की भी खरीद की। अलबत्ता उन्हें लक्ष्मी पूजन की महत्ता के बारे में ज्यादा पता नहीं था। सम सेंडड्यून्स के आसपास स्थापित रिसोर्ट्स आदि में दिवाली के रात जमकर धमाल हुआ। आकाश में उठते-गिरते आतिशी नजारों ने धोरों को जगमगा दिया। स्वर्ण-सी पीली रेत के कण अमावस की काली रात में जगमगा उठी।
इस मौके पर पर्यटन व्यवसायियों ने अपनी होटलों व प्रतिष्ठानों में सुन्दर सजावट की। विदेशी मेहमानों ने स्थानीय लोगों के साथ जमकर पटाखे छोड़े। बिना आवाज के फुलझडिय़ां, अनार और चक्करी चलाना उन्हें बेहद पसंद आया। उन्होंने रंग-बिरंगी रंगोलियों व जगमगाते दीपकों के बीच अपने व साथियों के फोटो खींचे। जैसलमेर की धरा पर इस तरह से 'वसुधैव कुटुम्बकम की भावना इन क्षणों में साकार होती नजर आई। विदेशी सैलानियों महिलाओं व बच्चों के बीच दीपावली का उत्साह देखते ही बन रहा था। कईविदेशी महिलाओं व पुरुषों ने पारम्परिक भारतीय परिधान भी पहने।





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