भुवनेश पण्ड्या/उदयपुर . सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के एक असिस्टेंट प्रोफेसर टिकमचंद दाकल ने बुधवार को विभाग में अकारण बनाए जा रहे दबाव का हवाला देते हुए आत्महत्या करने का संदेश सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बुधवार अलसुबह करीब 4 बजे सोशल मीडिया पर डाले गए इस संदेश से पौ-फटने तक विवि में हडकंप मच गया। सुबह से शाम तक इसकी चर्चा रही। मामले में रजिस्ट्रार एचएस भाटी ने कमेटी गठित कर मामले की जांच के निर्देश दिए है।
पत्रिका ने जब असिस्टेंट प्रोफेसर दाकल से बात करने का प्रयास किया तो सुबह से अपराह्न तक उनका फोन बंद था। जब शाम को उनसे मिलने कर चर्चा की तो सामने आया कि प्रो. राजेश दुबे उन पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं। मंगलवार को पूरी रात परेशान होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर संदेश डालने का कदम उठाया था। दाकल ने पत्रिका को बताया कि फिलहाल उनके पास डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एण्ड टेक्नॉलोजी और यूजीसी के दो प्रोजेक्ट हैं, जिनका बजट करीब 50 लाख रुपए है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलों को बिना किसी कारण रोक रहे हैं। उनका कहना है कि यह कार्य असिस्टेंट प्रोफेसर देख नहीं सकते, प्रोफेसर को देखने चाहिए।
कमेटी बनाकर जांच करवा रहे हैं
हमारे पास मामला आया है। जल्द ही कमेटी बनाकर जांच करवा रहे हैं। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
एचएस भाटी, रजिस्ट्रार सुविवि
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यह संदेश हुआ वायरल
(अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद)
प्रिय मित्रों
मैं कई दिनों से बहुत तनावग्रस्त हूं। कोई मुझे परेशान करने और पेशेवर रूप से भेदभाव करने की कोशिश कर रहा है। मैं न तो अच्छी तरह सो और ना ही खा पा रहा हूं। हमेशा चिंता और चिंता। अब मैं थक चुका हूँ। मैं उसके साथ और अधिक चर्चा नहीं करना चाहता हूं। मैं खुद को मार डालूंगा और कभी भी आत्महत्या कर लूंगा। आप मुझे ट्रेन के ट्रैक, सेवाश्रम, एफएस या विभाग में तलाश कर सकेंगे। एचवीसी, रजिस्ट्रार, डीन और एससी-एसटी सेल को संबोधित करने वाले पत्र में इसके कारण का उल्लेख करूंगा और उसे मैं अपने कार्यालय या घर में रखूंगा। मैं उन्हें जीवन में बड़ी सफलता की कामना करता हूं।
डॉ. टिकमचंद, बायोटेक
मेधावी है दाकल
इटली, कनाड़ा सहित कई अन्य देशों से पढ़ाई कर चुके टिकमचंद मेधावी विद्यार्थी रहे हैं। नेचर नामक पत्रिका में अपने शोध पत्र प्रकाशन के लिए प्रोफेसर्स को कई-कई साल लग जाते हैं, लेकिन टिकमचंद के शोध पत्र उसमें प्रकाशित हो चुके हैं। कुछ समय पहले हुई भर्ती में टिकमचंद ने बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर बायोटेक्नोलॉजी में ज्वाइन किया था।
आरोप गलत
हम तो उनका सहयोग कर रहे हैं। हम क्यों किसी को परेशान करेंगे, कभी ऊंची आवाज में बात तक नहीं करते। उन्होंने ऐसा क्यों किया, यह हमें भी परेशान कर रहा है। हम उनसे सम्पर्क का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वह रिस्पोंस नहीं दे रहे। जो भी आरोप लगाए हैं, वह पूरी तरह गलत हैं।
प्रो.राजेश दुबे,
विभागाध्यक्ष बायोटेक
डॉ राजेश दुबे के काले कारनामों में एक कड़ी और जुड़ गई है। दुबे ने होनहार शिक्षक डॉ टीकम चंद को कार्यस्थल पर शोषण एवं मानसिक प्रताडऩा देते हुए सुसाइड नोट लिखने के लिए उकसाया है। टीकमचंद के 45 लाख के डीएसटी के प्रोजेक्ट को दुबे हड़पना चाहते हैं। सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (सुटा) ने इस मामले की उच्च स्तरीय कमेटी से जांच की मांग की है। दोषी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हमने इसे लेकर रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा है।
देवेन्द्रसिंह, अध्यक्ष सुटा
उचित मांगों का निस्तारण हो
टीकमचंद हमारा जीनियस साथी है। हम लोग निरन्तर उसके सम्पर्क में है। कुलपति व रजिस्ट्रार से भी इस बारे में बात हुई है। शैक्षिक संघ का मानना है कि आपसी सामंजस व सद्भाव से किसी भी शिक्षक की उचित मांगों का निस्तारण हो।
बालूदान बारहठ, महामंत्री, विवि शैक्षिक संघ





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