करौली. जब मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बाधाएं भी किसी को आगे बढ़ पाने से रोक नहीं पाती। कहा जाता है कि मन में जो ठाना और तय मंजिल की ओर बढ़ते जाना का ध्येय लेकर आगे बढऩा ही प्रगति का द्योतक है। बुलंद हौसलों के साथ कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है, जिले के कोटा (महौली) निवासी अमरसिंह माली ने।
अमरसिंह आज ना केवल देश, बल्कि विदेश में भी भारतीय संगीत का जलवा बिखेर रहा है। हाल ही में अफ्रीका महाद्वीप के देश इथियोपिया में वल्र्ड म्यूजिक सेमीनार में अमरसिंह ने भारतीय संगीत की धुन बिखेरी। अपनी उपलब्धि को लेकर अमरसिंह कहते हैं कि यह सब माता-पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद से संभव हो सका।
कोटा (महौली) में गरीब किसान रामकिशोर माली के परिवार में जन्मे अमरसिंह माली की प्रारम्भिक शिक्षा अपने गांव और करौली में हुई। संगीत में रुचि होने के कारण राजस्थान संगीत संस्थान से 8 वर्षीय भारतीय संगीत (गायन) में संगीत का हुनर सीखा।
साथ ही राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग से (एमए) भारतीय शास्त्रीय संगीत गायन 2010 में किया तथा 2010 में ही स्लेट एवं 2012 में नेट परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्तमान में केन्द्रीय विद्यालय संगठन, बीएसएफ जोधपुर में संगीत अध्यापक के पद पर कार्यरत अमरसिंह को उनके हुनर के लिए कई सम्मान मिले हैं। राजस्थान की पूर्व राज्यपाल प्रतिभा पाटिल भी अमरसिंह को सम्मानित कर चुकी हैं।
इसके अलावा राजस्थान हिंदी ग्रन्थ अकादमी के पुस्तक पर्व में गायन और संगीत संयोजक, निर्देशन के लिए भी वे सम्मानित हो चुके हैं।
पंडित आलोक भट्ट से सीखे गुर
अमर सिंह ने जयपुर के वरिष्ठ संगीत गुरू पंडित आलोक भट्ट से गुरु-शिष्य परम्परा में 6 साल तक भारतीय शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखीं। संगीत विषारद संगीत गुरू डॉ. लक्ष्मी रानी माथुर और संतोष कुमार रॉय के निर्देषन में किया। एमए संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष और डीन संगीत गुरु प्रोफेसर डॉ. सुमन यादव, डॉ. मधु भट्ट, डॉ. सत्यवती शर्मा के निर्देशन में किया।
विदेश में भी दिया व्याख्यान
अफ्रीका महाद्वीप के देश इथियोपिया में गत माह आयोजित पांच दिवसीय वल्र्ड म्यूजिक सेमीनार में अमरसिंह को विश्व संगीत पर व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया गया। यह सेमीनार वोलो विश्वविद्यालय डेसी इथियोपिया के संगीत विभाग द्वारा आयोजित की गई थी।
माली ने अपने व्याख्यान में नॉन सेंस सिलेबिक म्यूजिक पर व्याख्यान दिया तथा तराना और ख्याल गायकी से मास्टर के विद्यार्थियों को भारतीय संगीत से रूबरू कराया
विदेशी शिष्य भी
अमरसिंह ने भारतीय संगीत की महक केवल देश तक ही सीमित नहीं रखी है, बल्कि उनके कई विदेशी शिष्य भी हैं। जिन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत की शिक्षा दी है।
इनमें प्रमुख रूप से वेन्टे नेल्सन डेनमार्क से हैं, जो यूरोप में भारतीय संगीत की धुन बिखरेती हैं। अंतर्राष्ट्रीय नृतक गुलाबो सपेरा और मुरारी भारती सैनी के साथ भी कई अमरसिंह संगीत कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं।





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