कोटा डिजिटल डेस्क. अब चुनाव केवल जीतने के लिए लड़े जाते हैं। पुरानी परिपाटी को नए नेता कभी के तिलांजलि दे चुके हैं। एक जमाने में अपने से छोटे और युवा नेताओं के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार करते थे, भले ही वे स्वयं चुनाव के मैदान में हो या न हों । ऐसे ही नेताओं में एक नाम शूमार है भाजपा के दिग्गज नेता दिवंगत ललित किशोर चतुर्वेदी का।
2003 के चुनावों में जब चतुर्वेदी दीगोद से चुनाव मैदान में थे और कोटा की सीट से युवा नेता और मौजूदा सांसद ओम बिरला पहली बार चुनाव लड़ रहे थे तब चतुर्वेदी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम में से समय निकालकर बिरला के लिए समर्थन में चुनाव प्रचार किया था। हालांकि चतुर्वेदी अपने आखिरी चुनाव में स्वयं चुनाव नहीं जीत पाए लेकिन ओम बिरला ने तब के पर्यटन मंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता शांति धारीवाल को भारी मतों से हराकर जीत हासिल की थी।





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