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हादसा हो गया तो हाथ मलते रह जाएंगे, पीछे रहेगा केवल धुआं और राख

जालोर. दीपावली के पर्व पर शहर के भीमरी इलाकों में आगजनित हादसा हो जाए तो भगवान ही मालिक है। यह भी गनीमत है हर वर्ष भगवान लाज रख लेते हैं और बचाव हो जाता है, लेकिन कभी संकरे बाजार में ऐसी घटना हो जाए तो हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। पीछे केवल राख और धुआं ही नजर आएगा। नगर परिषद संचालित दमकल केंद्र के पास केवल दो बड़े वाहन ही है। इन बड़े वाहनों से भीतरी इलाकों में आग बुझाने की बात तो दूर वहां तक पहुंचना ही मुश्किल है। कड़ी मशक्कत करते हुए बाजार में कुछ आगे तक वाहन चले भी जाते हैं, लेकिन भीड़-भाड़ वाले मुख्य बाजार तक पहुंचना नामुमकिन ही है। दीपावली पर्व के दौरान आतिशबाजी परवान पर रहती है। ऐसे में आग की आशंका से इनकार भी नहीं कर सकते। लिहाजा संकरे बाजार में पुख्ता प्रबंध किए जाने की दरकार है अन्यथा बड़े हादसे में हाथ मलने के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा। यह दोनों वाहन भी आसपास के कई गांव कवर करने का एकमात्र साधन है। शहर के लिए छोटे दमकल वाहन की जरूरत है, लेकिन नगर परिषद ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। हां, दीपावली पर ट्रैक्टर टैंकर जरूर खड़ा कर लेते हैं, ताकि जरूरत पडऩे पर भीतरी इलाकों में भेज सके। इस नाकाफी व्यवस्था के भरोसे कभी बड़े हादसे से इनकार भी नहीं किया जा सकता।
छोटे की जरूरत पर लाते नहीं
जिला मुख्यालय पर नगर परिषद की ओर से अग्निशमन केंद्र संचालित है। इसमें दो वाहन है, लेकिन दोनों ही वाहन काफी बड़े हैं। जिला मुख्यालय होने के बावजूद छोटा वाहन यहां उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आग की छोटी घटनाओं के दौरान भी बड़े वाहन ही भेजे जाते हैं। छोटी घटना के दौरान छोटा वाहन कम समय में एवं कम खर्च से पहुंच सकता है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
बाल्टियों से पानी फेंकने का प्रबंध
हालांकि प्रशासनिक स्तर पर संकरे बाजार में व्यवस्था के लिए ट्रैक्टर टैंकर मौके पर मौजूद रखने का दावा किया जा रहा है, लेकिन टैंकर कितना काम दे पाएगा यह सोच सकते है। दमकल की पाइप से प्रेशर के साथ निकलने वाला पानी जितनी तेजी से आग बुझाता है उसकी तुलना में टैंकर की व्यवस्था काफी कम है। टैंकर का पानी बाल्टियां भर-भरकर फेंकने के जरूर काम आ सकता है।
एक साथ आग लगने पर मुश्किल
जिला मुख्यालय का यह दमकल केंद्र जालोर, सायला, आहोर समेत आसपास के दर्जनों गांवों को कवर करता है। दीपावली, होली और गर्मी के दिनों में इसकी खासी मांग रहती है। अन्य दिनों में ज्यादा जरूरत नहीं रहती। बड़े ही सही पर महज दो वाहन होने से अक्सर अलग-अलग जगहों पर एक साथ आग की घटनाएं होने पर मुश्किल बढ़ जाती है।
... तो आग तक नहीं पहुंच पाते
बताया जा रहा है कि जालोर के संकरे बाजार में कुछ माह पहले आग की घटना हो चुकी है। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि दमकल वाहन अंदर तक ले जाना मुश्किल भरा था, लेकिन कुदरत ने ही बचा लिया अन्यथा सब जल जाता। दुकानों के बाहर तक रखे सामान व तिरपाल हटाते हुए किसी तरह वाहन को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद आग तक पहुंच पाए। आग की घटना ठेठ अंदर तक होती तो पहुंचना मुश्किल था।

यह है स्थिति
- केंद्र पर अभी दो वाहन है, एक 14500 व दूसरा 3500 लीटर क्षमता का
- संकरे बाजार में कार व जीप ले जाना भी काफी मुश्किल भरा काम है
- दुकानों के बाहर तक रखा सामान, ऊपर बंधे तिरपाल, मुश्किल बढ़ाते हैं
- त्योहारी सीजन में भीड़भाड़ बढऩे से अंदर तक वाहन पहुंचना मुश्किल
- बाजार के लिए ट्रैक्टर टैंकर रखा हुआ है, लेकिन यह कामचलाऊ व्यवस्था है
छोटी दमकल नहीं है...
अभी हमारे पास दो बड़े वाहन अच्छी कंडीशन में है इनसे काम चला रहे हैं। छोटी दमकल नहीं है। जहां बड़ा वाहन नहीं जा सकता वहां की जरूरत के हिसाब से ट्रैक्टर टैंकर रखा हुआ है। फिलहाल हमारे पास कार्मिक भी पर्याप्त है।
- द्वारकाप्रसाद वैष्णव, दमकल केंद्र प्रभारी, जालोर



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