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-झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र के खानपुरिया वासियों की उभरी पीड़ा

बिना सरपंच की पंचायत ने लिया मतदान के बहिष्कार का निर्णय
-झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र के खानपुरिया वासियों की उभरी पीड़ा
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. राज्य की सबसे चर्चित सीट झालरापाटन की ग्राम पंचायत खानपुरिया के एक ग्रामीण ने फोन कर पत्रिका संवाददाता जितेंद्र जैकी को एक खबर देेने के लिए तुरंत गंाव में आने की सूचना दी। शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे जैसे ही गांव पहुंचा तो गांव के मंदिर व स्कूल के सामने खड़ी युवाओं की टोली ने शायद आभास कर लिया कि यहीं पत्रकार है तो उन्होने बाइक रुकवाई और अपनी समस्या सुनाने में जुट गए। एक जागरुक युवा ने कहना शुरु किया कि प्रदेश में इन दिनो चारो ओर मतदान करने की अलख जगाई जा रही लेकिन दूसरी ओर जिले के झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मुख्यालय खानपुरिया के लोग अपने गांव में विकास की उपेक्षा से दुखी होकर मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय कर बैठे है। इसी बीच गांव के चौक में ग्रामीणों की भीड़ जमना शुरु हो गई और सबके एक ही स्वर में कहा कि 'म्हांकी कोई सुन ही नी रियों, तो फैर काई करां....इन कारणे अब कोई भी बोट नी डालेगो...गांव में सबसे बड़ी समस्या सिंचाई के लिए पानी नही होना है इसके लिए हर छोटे से लेकर मुख्यमंत्री के सामने तक उन्होने गुहार लगाई लेकिन कोई हल नही निकला। ग्राम पंचायत की सरपंच को भी फर्जी मार्कशीट के मामले में करीब दो साल पहले हटा दिया गया है, इससे गांव का पूरा विकास भी रुक गया। ग्रामीणों का दर्द है कि निकट में स्थित थर्मल प्लांट के लिए उनकी जमीनें अधिगृहित कर ली गई थी लेकिन जो बची है वह भी पड़त पड़ी है उस ओर कोई ध्यान नही दे रहा है। सरकार द्वारा थर्मल तक कालीसिंध नदी से पानी पहुंचाया जा रहा है आसपास के गांवों में कनवाड़ा बांध की नहर आ रही है लेकिन खानपुरिया में सिंचाई के लिए पानी नही मिल पा रहा है। गांव वालों का आक्रोश है कि दोनो पार्टियों के नेताओं ने कई बार सिर्फ आश्वासन ही दिए लेकिन काम नही किया।
-गांव की स्थिति
झालावाड़ जिला मुख्यालय से करीब 9 किलोमीटर दूर स्थित जिले की झालरापाटन पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मुख्यालय खानपुरिया में करीब 250 मकान है इसमें करीब दो हजार की जनसंख्या है और करीब 15 सौ मतदाता है। गांव में करीब दो हजार बीघा जमीन पड़त पड़ी है। ग्रामीणो की आजीविका का मुख्य साधन कृषि है लेकिन जमीने पड़त पड़ जाती है। पंचायत चुनाव में यहां से सरपंच पद पर ममता भील विजयी हुई थी लेकिन बाद में उसे फर्जी मार्कशीट पर चुनाव जीतने के मामले में हटा दिया गया।
-बैठक में सर्वसम्मति से किया निर्णय
गांव में विकास की उपेक्षा से आहत होकर ग्रामीणों ने मंदिर पर बैठक आयोजित की, इसमें गांव के सभी परिवारों के मुखिया व युवा एकत्र हुए व निर्णय किया कि गांव में मतदान का बहिष्कार किया जाएगा। अगर कोई मत देने जाने की पहल करेगा तो तो उसका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। गांव के बल्लभ पाटीदार, नितेश, रामलाल, केशव पाटीदार व सांवरिया की अगुवाई में युवाओं की टीम ने सरकार व दोनो राजनैतिक पार्टियों के प्रति भारी आक्रोश व्यक्त किया। उन्होने कहा कि गांववालों ने अब निर्णय कर लिया है कि गांव में किसी भी नेता को घुसने नही दिया जाएगा। अब आश्वासन नही काम चाहिए।
-ग्रामीणों की पीड़ा
गांव के हर युवा व बुर्जुग की यही पीड़ा है कि थर्मल बनते समय लगा था कि गांव का विकास होगा, थर्मल वाले गांव को गोद ले लेगे लेकिन अब थर्मल वाले भी ध्यान नही देते। ग्रामीणों को हर नेता ने आश्ववासन दिया कई बार सत्तापक्ष के नेता व पदाधिकारियों ने कहा कि गांव में अब नहर निकलने वाली है इस पर गांव में खुशी का माहौल रहा, मिठाईयां भी बांटी गई। लेकिन कोई हल नहीं निकला। इस दौरान गांव में लगे प्रशासन के शिविर में भी लोगों ने अधिकारियों व नेताओं से गुहार लगाई तो नेताओं ने दुत्कार दिया व धमकी दी।
-इस तरह मुखर हुए ग्रामीण
गांव के युवा सुरेश गूजर ने कहा कि हमने जब सत्तापक्ष के मंत्री पद पर काबिज व्यक्ति से अपनी गुहार लगाई तो उन्होने धमकी दी कि गांव में पीने का पानी भी नही रहने दूंगा। इस पर हमने मतदान के बहिष्कार का निर्णय किया। हम जब नेताओं के पास जाते है तो हमे भगा दिया जाता है,गांव में आकर तो वह बहुत सारी चिकनी चुपड़ी बाते करते है। कंधे पर हाथ रखकर प्यार से बाते करते है लेकिन बाद में जब घर पर जाओं तो मिलते नही है अगर किस्मत से मिल भी गए तो पहचाना तो दूर बात तक नही करते।
-हाथ में मांग पत्र लेकर खड़े युवा केशव पाटीदार ने कहा कि अब हमारे सामने कोई विकल्प नही बचा इसलिए मतदान के बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा। चुनाव के समय नेता झूठे वादे कर जाते है बाद में कहो तो आंख दिखाते है। अब हमने सोच लिया कि जिस तरह नेता हमे आंख दिखाते है उसी तरह अब हमारी बारी है आने दो नेताओं को गांव में देखते है।
-नितेश पाटीदार ने कहा कि नेताओं ने हमे बहुत ***** बना लिया अब हम ***** बनने वाले नही है, चुनाव के समय हम उनको अपनी ताकत दिखा देगे। बडे नेताओं से ज्यादा तो छोटे नेता हमे भगा देते है। हमने छोटे से लेकर बड़े से बड़े अधिकारी व जन प्रतिनिधी तक गुहार की है। चुनावी सभा व पार्टी के कार्यक्रमों में ले जाने के लिए आ जाते है मगर गांव की समस्या की बात करो तो चुप कर देते है।
-ग्रामीण रामचंद पाटीदार ने कहा कि मेरी 74 साल की उम्र है करीब 30 साल से राजनैतिक पार्टी वाले गांव के विकास की कह रहे है लेकिन खेती करने वाले बाजार से गेंहू खरीद कर ला रहे है इससे खाना बन रहा है जबकि हमारे पास खुद की जमीने है लेकिन पानी नही है इसलिए ऐसा करना पड़ रहा है। हमारी तरफ कोई ध्यान तो दे।
-गांव के तुफान ने बताया कि चुनाव के समय ही दोनो पार्टी के लोग आते है उनको कहने पर वह कागज पर गांव की समस्या लिख लेते है और कहते है कि समस्या का समाधान हो जाएगा आप तो बस वोट दे दो, हम वोट दे देते है लेकिन मत देने के बाद व चुनाव होने के बाद यह भी भूल जाते है कि खानपुरिया कहां पर है। कहते है आप कौन हो। अभी भी दोनो पार्टी के लोग आ रहे है। अब हम बता देेगें की हम कौन है।
-गांव के युवक बल्लभ पाटीदार ने भी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि इस बार के चुनाव में हम बहिष्कार कर अनपा गुस्सा प्रदर्शित कर रहे है आगामी दिनों में हमारी आंदोलन समस्या हल होने तक जारी रहेगा। इस दौरान हम अपनी बात मनवाने के लिए हर सम्भव प्रयास करेगें।
-ग्रामीणों की समझाईश करेगें
इस सम्बंध में ग्राम पंचायत खानपुरिया के सचिव राधेश्याम राठौर ने कहा कि खानपुरिया वालों ने अगर मतदान के बहिष्कार का निर्णय किया है तो गांव में बैठक कर उनकी समस्या को सुनकर मतदान के लिए समझाईश की जाएगी।



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