भुवनेश पंड्या/ उदयपुर . सर्दी चमकने से पहले ही गत एक पखवाड़े में स्वाइन फ्लू तीन रोगियों को ग्रास बना चुका है। आगामी दिनों में सर्दी और बढऩे के साथ ही स्वाइन फ्लू के वायरस को अनुकूल वातावरण मिलेगा। ऐसे में स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढऩे की आशंका है।
कश्मीर एवं हिमालय के तराई वाले क्षेत्रों में हिमपात के बाद गत कुछ दिनों से रात को सर्दी का असर बढ़ा है। हालांकि दिन में मौसम गर्म बना हुआ है। अभी ये एक के बाद एक मरीज सामने आने लगे हैं। संभाग मुख्यालय स्थिति एमबी चिकित्सालय में स्वाइन फ्लू के उपचार को लेकर जांच के साथ ही मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड है। उल्लेखनीय है कि गत पांच वर्षों में जिले के 33 रोगियों की स्वाइन फ्लू की मृत्यु हो चुकी है।
ये हैं स्वाइन फ्लू के कारण
स्वाइन फ्लू को वायरस एच1एन1 के नाम से भी जाना जाता है। यह सूअरों के श्वसन तंत्र में पाए जाने वायरस के संक्रमण से होता है। इसकी चपेट में आने वाला इस इंफ्लुएंजा का शिकार हो सकता है। इससे बचने के लिए इसकी पहचान करना आवश्यक है। इंफ्लुएंजा वायरस की खासियत यह है कि यह लगातार अपना स्वरूप बदलता रहता है जिससे यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी छका देता है। इंफ्लूएंजा के वैक्सीन का भी इस वायरस पर असर नहीं होता।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
1 बुखार
2 तेज ठंड लगना
3 गला खराब हो जाना
4 मांसपेशियों में दर्द होना
5 तेज सिरदर्द होना,
6 खांसी आना
7 कमजोरी महसूस करना आदि लक्षण इस बीमारी के दौरान उभरते हैं।
वल्र्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर एनिमल हैल्थ के अनुसार यह वायरस अब केवल सूअरों तक सीमित नहीं है, इसने इंसानों के बीच फैलने की स्थिति भी बन चुकी है।
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जिले से यूं बांटी गई टेमी फ्लू ( 30एमजी)
वर्ष पहुंची दवा जारी की गई दवा
2014 20 हजार 0
2015 57 हजार 54450
2016 -- 10450
2017 28900 18950
2018 दो हजार 8750
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टेमी फ्लू (75 एमजी)
वर्ष पहुंची दवा जारी की गई दवा
2014 - 0
2015 161300 76400
2016 - 45150
2017 90900 44000
2018 16 हजार 27070
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टेमी फ्लू (12 एमजी)
वर्ष पहुंची दवा जारी की गई दवा
2014 450 0
2015 3850 1670
2016 - 3264
2017 1670 1517
2018 1000 811
यूंं स्वाइन फ्लू देता रहा है जिंदगी को मात
वर्ष कुल नमूने लिए पॉजिटिव मृत्यु
2014 79 03 02
2015 845 207 16
2016 12 0 0
2017 404 174 10
2018 347 64 02
इस एक पखवाड़े में तीन मरीजों की मौत हो चुकी है।
स्वाइन फ्लू में पॉजिटिव संख्या ज्यादा है, इसमें कई मरीजों को बचाया गया है। आमतौर पर जब मरीज को दूसरी बीमारी होती है या मरीज गर्भवती होती है, तब समस्या बढ़ जाती है, या मौत का कारण मरीज का देरी से हॉस्पिटल पहुंचना है।
डॉ डीपी सिंह, प्राचार्य आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर





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