Breaking News
recent

ये हैं मरीजों को राहत देने वालों के हाल


खींचतान में उलझी एसके की सफाई व्यवस्था
पीएमओ बोले सफाई के लिए होगा ओपन टेंडर, ठेकेदार बोला नहीं करने देंगे नए को काम
सीकर. एसके अस्पताल की सफाई व्यवस्था ठेकेदार और अस्पताल प्रबंधन की खींचतान के बीच उलझ कर रह गई है। इससे मरीजों को पिछले दो दिन से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नए टेंडर के अनुसार ठेकेदार को एक नवम्बर से काम शुरू करना था। हालांकि टेंडर की शर्तों के अनुसार टेंडर लेने वाले को दस दिन का समय दिया जाता है। उसी दस दिन के समय के चलते एक नवम्बर से अस्पताल की सफाई व्यवस्था बेपटरी हो गई। वहीं सफाई नहीं होने से पीएमओ ने ओपन टेंडर जारी करने की बात कही है। इसके तहत 11 नवम्बर तक अस्पताल प्रबंधन किसी ओर से सफाई का काम कराएगा। इसमें जो भी खर्च आएगा वह एक नवम्बर से टेंडर लेने वाले से ही वसूला जाएगा। साथ ही 11 नवम्बर तक काम शुरू नहीं करने पर नए ठेकेदार की अमानत राशि से दो फीसदी राशि जब्त होगी। वहीं 31 अक्टूबर तक टेंडर लेने वाले पूर्व ठेकेदार के कर्मचारी नए ठेकेदार को काम नहीं करने की धमकी दी है।
कर्मचारी पड़े कम
हालांकि ऐसी स्थिति में अस्पताल के कर्मचारी सफाई करते हैं लेकिन जिले का बड़ा अस्पताल होने के कारण कर्मचारियों की संख्या सफाई के लिए कर्मचारियों की संख्या कम पड़ रही है। वहीं नगर परिषद ने भी कर्मचारियों को नहीं भेजा है। इधर, एसके अस्पताल की सफाई के पुराने ठेकेदार के प्रतिनिधि शंभूदयाल ने आरोप लगाया कि अस्पताल में सफाई कर्मचारियों की उपेक्षा की जा रही है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से दिए गए कई चेक बाउंस हो गए। यही कारण है कि एसके और जनाना अस्पताल में व्यवस्था बेपटरी है।
& एसके अस्पताल में सफाई के लिए 12 कर्मचारी लगाए गए हैं लेकिन नगर परिषद की ओर से कर्मचारी नहीं भेजने के कारण सफाई प्रभावित हो रही है। सफाई के लिए आज 15 नए कर्मचारियो को लगाया गया है।
डॉ. हरि सिंह, पीएमओ एसके अस्पताल
खामी में अटकी मरीजों की जांच

सीकर. स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता बतरने का दावा करने वाला चिकित्सा विभाग खुद मरीजों के इलाज के लिए गंभीर नहीं है। इसकी बानगी है कि चिकित्सा संस्थानों में लाखों रुपए की मशीनरी की देखरेख का अनुबंध करने में ध्यान नहीं रखा। नतीजन जिला अस्पताल में खराब बॉयोमेट्रिक मशीन की मरम्मत को लेकर चिकित्सा विभाग और देखरेख करने वाली के बीच महज मौखिक बात ही हो रही है। न तो अस्पताल ने कंपनी को पत्र लिखा और न ही कंपनी ने अस्पताल में आने का दिन तय किया। दोनों एक दूसरे पर ही जिम्मेदारी डाल रहे है। गौरतलब है कि पिछले चार दिन से अस्पताल में मरीजों की बॉयोमेट्रिक जांच नहीं हो रही है। अस्पताल में लगी मशीनों की मरम्मत के लिए केपीटीएल कम्पनी को जिम्मा दिया गया है। मशीनों की मरम्मत और मेंटीनेंस की जिम्मेदारी इस कम्पनी की है। लैब में काम करने वाले एलए ने बताया कि केपीटीएल कम्पनी ने बायोमेट्रिक मशीन का बीमा ही नहीं कराया। वारंटी की अवधि के दौरान तो कंपनी के प्रतिनिधि तुरंत ही मरम्मत के लिए आ जाते थे लेकिन वारंटी अवधि निकलने के बाद अब कंपनी आने से आनाकानी कर रही है। वही लैब की ओर से कंपनी को कोई पत्र नहीं लिखा गया है। इस कारण मरम्मत का काम अटका हुआ है।
चुकाए चार लाख
बायोमेट्रिक मशीन खराब होने के कारण पिछले चार दिन में अस्पताल में आउटडोर और इंडोर के मरीजों को जांच के लिए निजी लैब में करीब चार लाख रुपए देने पडे हैं।& केपीटीएल कम्पनी का तर्क है कि मशीन का इंश्यारेंस नहीं होने के कारण मरम्मत का खर्च अस्पताल प्रबंधन भुगते वहीं प्रबंधन को कंपनी ने लिखित डिमांड ही नहीं भिजवाई है। ऐसे में असमंजस की स्थिति है।
डॉ. हरिसिंह, पीएमओ सीकर



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.