आबूरोड. शहर में कई स्थानों पर घरों से निकलने वाले कचरें को जला दिया जाता है, यहीं नहीं मोर्चरी तथा किंवरली नदी के पास बनाए अस्थाई डंपिंग यार्ड में भी रोजाना आग लगा दी जाती है, ऐसे जिस जगह पर कुछ देर खड़े हो पाना भी मुश्किल है। कचरें से उठता धूंआ कई प्रकार की बिमारियों को न्यौता दे रहा है। धूआ व कचरें के बावजूद यहां पर कई बच्चे अपने परिजनों के साथ कचरें में पड़े सामान को ढूढंते नजर आते है। ऐसे में इनको विभिन्न बिमारियां हो सकती है, लेकिन पेट के लिए कुछ तो करना ही पड़ता है। ये लोग इस प्रदूषण से होने नुकसान से अनजान है। कचरा बिनने वाले छोटे बच्चें व महिलाएं भी इस कचरे के ढेर से अपने काम की सामग्री तो निकाल रहे हैं, लेकिन उन पर बीमारियों का भी खतरा बना हुआ है। शहर में भी कई स्थानों पर कचरा जला दिया जाता है।
यात्रियों के लिए भी परेशाानी
किंवरली नदी के किनारे माउंट समेत आस-पास का कचरा डाला जा रहा है। यह लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। किंवरली नदी से आमथला मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले लोगों के लिए कचरें से उठता धूआं बीमारियों को न्यौता भी दे रहा है। जहां कचरा निस्तारण के दौरान लगाई गई आग से निकलता धुआं जहां उस क्षेत्र से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
चलती है हवा तो सड़क पर आता है धूआं
इतना ही नहीं, हवा के तेज चलने कचरें से उठता धूआं सड़क तक आ जाता है। गंदगी के ढेर से निकलता धुआं लोगों के शरीर में जहर के रूप में घुलता जा रहा है, जिससे बचाव के लिए राहगीर को यहां से निकलने कई जतन करने पड़ रहा है।
अस्थमा व श्वास का खतरा रहता
डॉ. एमएल हिन्डोनियों ने बताया कि कचरें से उठते धूएं के कारण अस्थमा व श्वास का खतरा रहता है। कचरे के धुएं व्यक्ति के फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है। इससे खांसी, छींके आना, नाक में एलर्जी, श्वास चलना, धुआं आंखों में जाने से जलन, चर्मरोग जैसी बीमारियों हो सकती है।





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