प्रतापगढ़ वन विभाग की ओर से वन उपज संग्रहण, भंडारण और बिक्री केन्द्र बनाने के बाद यहां लघु वन उपज प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की गई है। जिससे यहां एलोवेरा और आंवला के उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इसमें विशेष रूप से ऐलोवेरा और आंवला का ताजा और शुद्ध जूस मिल सकेगा। वन विभाग की ओर से जिला मुख्यालय समेत जिले में तीन स्थानों पर इन केन्द्रों पर मशीनें लगाने के बाद इसी वर्ष से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। वन विभाग की ओर से इन स्थानों पर भवन बना दिए गए है। इनमें मशीनें लगाई जानी है।
वन सुरक्षा समितियों को रोजगार
विभाग की ओर से लघु वन उपज संग्रहण केन्द्र में विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यह उत्पाद स्थानीय वन सुरक्षा समितियों के माध्यम से ही तैयार किए जाने है। इन उत्पादों को तैयार होने के बाद विभाग की ओर से विपणन भी कराए जाएंगे। जिससे समितियों के सदस्यों को रोजगार मिलेगा। इसके लिए समितियों के सदस्यों को अन्य स्थानों पर ले जाकर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
जिले में तीन स्थानों पर बनाए है केन्द्र
वन विभाग की ओर से जिले में इस वर्ष तीन स्थानों पर लघु वन उपज संग्रहण केन्द्र बनाए गए है। जिसमें प्रतापगढ़ के बांसवाड़ा रोड स्थित करमदिया नर्सरी, धरियावद और पीपलखूंट में केन्द्र बनाए गए है। जबकि बांसी में पांच वर्ष से प्रसंस्करण केन्द्र चल रहा है। जिसमें एलोवेरो, आंवला का जूस व अन्य उत्पाद भी तैयार किए जा रहे है। इसके साथ ही यहां हर्बल गुलाल भी तैयार की जा रही है।
डेढ़ सौ हैक्टेयर में लगाया एलोवेरा
वन मंडल में आंवला, पलाश के काफी पेड़ है। वहीं ऐलोवेरा के भी प्लांटेशन लगा रखे है। ऐसे में यहां कच्चा माल भी काफी मिलता है। इसे देखते हुए विभाग की ओर से यहां प्रसंस्करण केन्द्र बनाए जा रहे है। रेंजर तेजपाल मीणा ने बताया कि बांसवाड़ा रोड स्थित करमदिया नर्सरी में भवन बनाया गया है। इसके लिए 13 लाख 50 हजार रुपए लगाए गए है। यह कार्य मनोहरगढ़ वन सुरक्षा समिति के माध्यम से कराया गया है। यहां एलोवेरा के लिए 50 हैक्टेयर में प्लांटेशन भी लगाया गया है। इसी प्रकार पंडावा में भी 100 हैक्टेयर में प्लांटेशन लगाया गया है। जिसमें ऐलोवेरा और अन्य औषधीय पादप लगाए गए है।
शुद्ध उत्पाद बनाएंगे
कांठल के जंगल में कई औषधीय पादप पाए जाते है। जिसमें आंवला और एलोवेरा भी काफी मात्रा में है। इसे देखते हुए बांसी में लघु वन उपज प्रसंस्करण केन्द्र पर उत्पाद तैयार किए जा रहे है। इसके अच्छे परिणाम को देखते जिले में धरियावद, प्रतापगढ़ और पीपलखूंट में भी लघु वन उपज संग्रहण केन्द्र बनाए गए है। इनमें हम शुद्ध उत्पाद बनाएंगे। इसके लिए विभाग की ओर से तैयारी की जा रही है।
अमरसिंह गोठवाल
उपवन संरक्षक, प्रतापगढ़





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