खण्डार. यहां में सिंघाड़े की खेती क्षेत्र में ही नहीं दूर दूर तक अपना रंग दिखा रही है। क्षेत्र के सिंघाड़े अपना रंग यूपी, दिल्ली छतीसगढ़ तक बिखेर रहे हैं। लोगों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। किसानों ने बताया कि सिंघाड़े का बीज आगरा में लाया जाता है । आगरा में 10-12 रुपए की सिंघाड़े की एक बेल मिलती है। एक किसान लगभग 30 से 35 हजार रुपए तक का बीज खरीद कर लाता है। तब जाकर सिंघाड़े की खेती तैयार की जाती है।
एक ही समाज के लोग कर रहे खेती : सिंघाड़े की खेती में कस्बे के एक ही समाज का एकाधिकार है। कस्बे के केवट समाज के करीब 50-60 परिवार के लोग सिंघाड़े की खेती करते हैं। बारिश के बाद से ही तालाबों व तलाईयों में सिंघाड़े के बीज को डालकर फसल तैयार करते हंै। करीब दो महीन में जाकर सिंघाड़े की फसल तैयार होती है। दशहरे के आस पास से बाजारों में सिंघाड़े बिकने के लिए आ जाते हंै।
दो माह की है सिंघाड़े की खेती : किसानों ने बताया कि सिंघाड़े की खेती दो माह की है। दो माह तक ही सिंघाड़े आते है। इसके बाद बेल लगभग समाप्त सी हो जाती है। दो माह तक किसान खेती के लिए अपने घरों को छोड़कर तालाबों के किनारे ही गुजर बसर करते हैं।
40 बीघा से अधिक में हो रहा सिंघाड़ा : किसानों ने बताया कि कस्बे में 40 बीघा से अधिक भूखण्ड पर पानी वाली जगहों पर खेती की जा रही है। इसमें करीब 15 बीस परिवारों मिलकर सिंघाड़े की खेती कर रहे हैं। इसमें रोजाना करीब दो चार गाडी सिंघाड़े हो रहे हैं। इनको दूर दूर तक बेेचने के लिए भेजा जाता है।
25-30 रुपए किलो में बिक रहा
सिंघाड़े का भाव बाजार में 25 से 30 रुपए किलो है। इससे किसानों को मुनाफा हो रहा है। किसानों ने बताया कि थोक भाव बाजार भाव से कम होने से किसानों को मुनाफा कम हो रहा है। किसान कम भाव में भी दो माह में करीब 70 से 80 हजार रुपए की आमदनी कर लेते हंै। इससे उनके परिवार का भरण पोषण हो जाता है।





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