अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की मुसीबतें बढ़ती ही जा रही हैं। राजस्थान हाइकोर्ट की ओर से कुलपति के कामकाज पर रोक के बाद अब प्राइवेट मेडिकल-डेंटल कॉलेज प्रवेश परीक्षा-2015 से जुड़ा मामला कागजों से बाहर आया है।
परीक्षा परिणाम से जुड़े मामले लेकर सीबीआइ (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने जांच शुरू कर दी है। तत्कालीन परीक्षा संचालकों से पूछताछ जारी है। इनसे परीक्षा संबंधित पत्रवालियां भी मंगवाई गई हैं।
प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल-डेंटल कॉलेज में दाखिलों के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने 17 जुलाई 2015 को प्राइवेट मेडिकल-डेंटल कॉलेज प्रवेश परीक्षा-2015 का आयोजन किया था।
अजमेर में 5, उदयपुर में 2 और जोधपुर के एक परीक्षा केंद्र पर परीक्षा हुई। इसमें 2 हजार 995 विद्यार्थी शामिल हुए थे। इसका परिणाम 21 जुलाई को जारी किया गया था।
कथित गड़बड़ी की शिकायत
पीसी-पीएमटी परीक्षा परिणाम से जुड़ी कथित गड़बड़ी की शिकायत राज्य सरकार, केंद्र सरकार तक पहुंची थी। पूर्व में यह परीक्षा जून में कराई जानी थी, लेकिन राजस्थान हाइकोर्ट में दायर एक याचिका के चलते इस पर रोक लगाई गई थी। लेकिन विश्वविद्यालय के विधि विभाग ने इसका प्रत्युत्तर दिया। इससे संतुष्ट होकर हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ पेनल्टी भी लगाई थी। लेकिन कुछ शिकायतें सीबीआइ तक पहुंच गई
पिछले महीने से शुरू हुई जांच
पीसी-पीएमटी-2015 में सीबीआइ ने तत्कालीन परीक्षा संचालकों को 26 अक्टूबर को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया था। साथ ही परीक्षा परिणाम और इससे संबंधित पत्रावलियां-दस्तावेज भी मंगवाए गए। सीबीआइ प्रत्येक पहलू के जांच में जुटी है। तथ्यों के आधार पर मामले की रिपोर्ट तैयार होगी। संभवत: ब्यूरो के कुछ अधिकारी अजमेर भी आएंगे।
इसलिए होती थी परीक्षा...
प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल-डेंटल संस्थानों में प्रवेश के लिए परीक्षा कराई जाती थी। सरकारी विश्वविद्यालयों को नोडल एजेंसी बनाकर परीक्षा होती थी। इसमें उत्तीर्ण विद्यार्थियों को निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेज में प्रवेश मिलते थे। मालूम हो कि निजी मेडिकल-डेंटल संस्थानों में कथित तौर पर मनमाफिक फीस वसूली की शिकायतें भी राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचती रही हैं।





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