भीलवाड़ा।
समर्थन मूल्य पर मूंग व उड़द बेचना अब किसानों के लिए और मुश्किल हो गया है। राजफैड ने नए आदेश में कहा कि सिर्फ उन्हीं किसानों से मूंग व उड़द खरीदें, जो गिरदावरी की मूल प्रति क्रय केंद्र पर जमा कराएंगे। अब तक गिरदावरी की पर्ची लेकर ई मित्र पर रजिस्ट्रेशन कराना होता था।
नए आदेश में कहा गया कि अब तक सरकारी समर्थन मूल्य पर मूंग-उड़द बेच चुके किसानों को भी गिरदावरी की मूल प्रति अपने बिक्री सेंटरों पर जमा करानी होगी अन्यथा भुगतान नहीं होगा। वैसे किसानों के रजिस्ट्रेशन लक्ष्य पूरे हो चुके व ई मित्र केंद्रों पर रजिस्ट्रेशन बंद है। १ नवम्बर तक ९०० से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके थे। लेकिन टोकन २३७ के ही जारी हुए।
पटवारी काट रहे
पटवारियों के लिए भी गिरदावरी की हस्तलिखित प्रति देने का काम मुश्किल हो गया है। पटवारियों को खसरा गिरदावरी की फर्द भरकर उस पर मुहर लगाकर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं। इसमें काफी समय जाया हो रहा है। ऐसे में पटवारी इस उलझाऊ प्रक्रिया से पीछा छुड़ाना चाहते हैं। कुछ पटवारियों ने किसानों को हस्तलिखित रिपोर्ट देने से मना कर दिया। किसानों ने बताया कि जब गिरदावरी की प्रमाणित फोटो प्रति बैंक व अन्य कार्यों के लिए मान्य है तो मूंग की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए इस आदेश की क्या जरूरत थी। किसान बालू गाडरी, ललित कुमार ने बताया कि सरकार मूंग व उड़द नहीं खरीदने के लिए आए दिन नए आदेश देकर रुकावट पैदा कर रही है।
अब तक ११० किसानों ने बेची फसल
क्रय विक्रय सहकारी समिति केन्द्र के खरीद प्रभारी रामेश्वर तेली ने बताया कि अब तक ११० किसान फसल बेचने आए है। इनमें ५७ किसानों ने उड़द के ११७२ क्विंटल, ३५ किसान मूंग के ७१७ क्विंटल तथा १८ किसानों ने ३५२ क्विंटल मंूगफली ही बेची है। तेली ने बताया कि नए आदेश के अनुसार हर किसान को खसरा गिरदावरी प्रमाण पत्र लाकर देना होगा। पहले फसल तुलवा दी लेकिन प्रमाण पत्र नहीं दिया है तो उन्हें पटवारी से खसरा गिरदावरी रिपोर्ट लाकर देनी होगी। उसके बाद ही उसके खाते में राशि आएगी।





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