राजसमंद. न्यायालय उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां द्वारा भी राजसमंद अरबन कॉपरेटिव बैंक लि. राजसमंद के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी ललितप्रकाश शर्मा को दोषी करार दिया। साथ ही गबन की वसूली मय ब्याज के करने के आदेश दिए। फिर भी राजसमंद अरबन बैंक के मौजूदा प्रबंधन द्वारा आरोपित शर्मा से गबन की राशि वसूल नहीं की। इससे वर्तमान सीइओ व अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। राजस्थान सहकारी समितियां जयपुर रजिस्ट्रार द्वारा अनियमितता की जांच के लिए सहकारिता विभाग राजसमंद के तत्कालीन निरीक्षक विनोद कुमार कोठारी को अनुसंधान अधिकारी नियुक्त किया। कॉपरेटिव एक्ट 57 के तहत न्यायालय उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां राजसमंद में 974/15 प्रकरण दर्ज हुआ। निरीक्षक कोठारी द्वारा की गई जांच के मुताबिक बीस लाख की बीमा पॉलिसी के बाद पूर्व सीईओ शर्मा ने खुद के निजी खाते से 26 लाख 6 4 हजार रुपए उठा लिए। बीमा पॉलिसी की प्रीमियम बैंक के लाभ हानि खाते में दर्ज किया, मगर संतुलन चित्र में उक्त राशि का उल्लेख नहीं किया। प्रीमियम का भुगतान कार्मिकों के वेतन, भत्ते मद से किया गया। पूर्व सीइओ शर्मा द्वारा खुद के बैंक खाते से उठा लिया। इस पर 1 अगस्त 2014 से साधारण ब्याज 13 फीसदी से मूल राशि सहित 29 लाख 99 हजार 58 7 रुपए ही जमा कराए गएग, जबकि बीमा प्रीमियम के रूप में जमा दिनांक से साधारण ब्याज 10 फीसदी जोडऩे पर 31 लाख 76 हजार 175 रुपए का गबन हुआ था। इस तरह एक लाख 76 हजार 58 8 रुपए कम जमा कराए गए। सुनवाई के बाद न्यायालय द्वारा 17 अक्टूबर 2016 को आरोप पत्र जारी कर 3 नवंबर 16 को सुनवाई का अवसर दिया। इस तरह जांच अधिकारी द्वारा नियम विरुद्ध बैंक के बीमा परिपक्वता की राशि खुद के नाम चैक बनवाकर आइसीआइसीआइ खाते से उठा ली। पौने दो लाख रुपए मय ब्याज के गबन करने पर दोषी करार दिया।
थाने में अब कराएंगे एफआइआर
बैंक के पूर्व सीइओ ललित प्रकाश शर्मा द्वारा जितना भी गबन किया गया। उसकी जल्द पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज करवाएंगे। जिसने गलत किया, उसके विरुद्ध एसीबी द्वारा कार्रवाई की जा रही है।
मुरलीधर भाटिया, अध्यक्ष, राजसमंद अरबन कॉपरेटिव बैंक, राजसमंद





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