अलवर. अपने बयानों से देशभर में खुद को और अलवर को सुर्खियों में लाते रहे ज्ञानदेव आहूजा का टिकट कट गया है। रामगढ़ से लगातार दो बार से विधायक आहूजा खुद टिकट को लेकर आश्वस्त थे। 1993 में पहली बार रामगढ़ से चुनाव लड़े आहूजा ने पहली बार जीत का स्वाद 1998 में चखा था। इसके बाद वे 2003 का चुनाव हारे थे। 2008 और 2013 में आहूजा ने रामगढ़ से कांग्रेस नेता जुबेर खान को हराया था। इनकी प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व से तनातनी कई बार खुलकर सामने आ चुकी थी। विधायक रहते हुए आहूजा ने अपने ही विधानसभा क्षेत्र मुख्यालय में थाने के बाहर दिनभर धरना दिया था। वहीं रकबर प्रकरण में आहूजा के बयान राज्य सरकार की लाइन से अलग नजर आए थे। इसके साथ ही उन्होंने कई ऐसे बयान दिए जो विवादित नजर आए।
उपचुनाव की हार
लोकसभा उपचुनाव में रामगढ़ से 37000 वोटों की हार भी टिकट कटने की वजह मानी जा रही है। आहूजा ने पिछले दिनों खुले में स्वीकार किया था कि वे पैसे लेते हैं। ऐसे पैसे को वे समाज हित में खर्च करते हैं।
संघ के प्रचारक रह चुके हैं
ज्ञानदेव आहूजा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं। ये भरतपुर में प्रचारक रहे थे। इसके बाद इन्होंने भारतीय मजदूर संघ में लंबे समय तक कार्य किया। वहीं रामगढ़ के चुनावों में इनकी छवि फायर ब्रांड नेता की बनी थी।
अभी इस पूरे मामले पर रामगढ़ विधायक चुप्पी साधे हुए हैं, उनका अलवर स्थित घर भी बंद है, आहूजा ने इस पूरे मसले पर दो दिन बाद कुछ भी कहने की बात कही है।





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