अलवर. पूरे राजस्थान में 200 विधानसभा सीटों पर टिकट बांटने में भाजपा व कांग्रेस पार्टी के दिग्गजों को अलवर जिले की 11 सीटों के प्रत्याशी चुनने में पसीने आ रहे हैं। यही कारण है कि अभी तक जिले के 22 टिकटों में से 14 पर प्रत्याशी चयन होना शेष है। कांग्रेस ने केवल तीन और भाजपा ने पांच टिकट घोषित किए हैं। जबकि दोनों पार्टियों को जिले में 11 विधानसभा सीटों पर 22 टिकट देने हैं।
कम टिकट घोषित किए जाने के कारण पूरे प्रदेश में अलवर जिला सबसे अधिक चर्चा में हैं। भाजपा ने 200 में से 162 टिकट और कांग्रेस ने 152 प्रत्याशी घोषित कर दिए। इस संख्या के औसत को देखें तो अलवर जिले में भी एक या दो सीट शेष रहनी चाहिए थी। जबकि अभी तक दोनों पार्टियों के कुल 22 प्रत्याशियों में से आठ को ही मैदान में उतार है। शेष 14 को इन्तजार है। जिसके लिए कई दर्जन संभावित प्रत्याशियों की नींद उड़ गई है। दावेदार बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। यही नहीं मुण्डावर में तो टिकट घोषित होने से पहले ही विरोध शुरू हो गया है। सबसे अधिक किशनगढ़बास, बहरोड़, अलवर शहर के टिकटों का पेच फंसा हुआ है।
जिले में भी भीतरी घमासान
पूरे जिले में भीतरी घमासान है। तभी तो पार्टियों का आलाकमान प्रत्याशी घोषित नहीं कर पा रहे। भाजपा की दो सूचियों में अलवर जिले के पांच प्रत्याशी ही घोषित हुए हैं। जबकि कांग्रेस की एक सूची में अलवर जिले में तीन प्रत्याशी ही उतारे हैं। नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख 19 नवम्बर है। प्रमुख दलों को अब मात्र दो दिन में सभी 11 सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित करने की मजबूरी है।
इसमें भी राजनीति बड़ी
प्रत्याशी उतारने में पार्टी के स्तर पर नेताओं की आपसी राजनीति ही भारी लग रही है। नहीं तो एक पार्टी के प्रत्याशी घोषित करने के बाद दूसरी पार्टी आसानी से अपना प्रत्याशी उतार सकती है। लेकिन फिर भी ऐसा नहीं हो रहा। जिन पांच सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं वहां कांग्रेस अभी उलझी हुई है। जहां कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी उतार दिए वहां अभी भाजपा ने टिकट घोषित नहीं किए हैं।





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