उदयपुुुर. मोहनलाल सुखाडिय़ा उदयपुर शहर से पहले विधायक थे। वे बाद में राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। सुखाडिय़ा यहां से कांग्रेस के बैनर पर चुनाव लड़े थे। उनके सामने पहला चुनाव लडऩे वाले मनोहरसिंह बेदला थे। बेदला निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और सुखाडिय़ा से 5 हजार 433 मतों से चुनाव हार गए थे। सुखाडिय़ा को 9हजार 179 मत मिले थे। जबकि मनोहरसिंह को 2 हजार 726 मत मिले।
उदयपुर तब और अब
चुनावों की दृष्टि से काफी बदल गया है। परिसीमन के बाद उदयपुर जिले में अब भले ही आठ विधानसभा सीटें रह गई हैं, लेकिन आजादी के बाद पहली विधानसभा के लिए 1952 में हुए पहले चुनाव के लिए कुल 10 विधानसभा क्षेत्रों में 13 विधायकों के स्थान निर्धारित किए गए थे। इनमें सात विधानसभा क्षेत्र एक सदस्यीय और तीन विधानसभा क्षेत्र द्वि सदस्यीय थे। द्वि सदस्यीय क्षेत्रों में सायरा, सलूम्बर और राजसमंद-रेलमगरा थे। तेरह में से भी दो उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए तो मतदान 11 सीटों के लिए ही हुआ।
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यह थी तब की स्थिति
इन चुनावों में सामान्य सीटें 10 और 3 सीटें आरक्षित थीं।
अनुसूचित जनजाति की दो सीटें सायरा, सराड़ा-सलूम्बर थीं।
अनुसूचित जाति की एक राजसमंद-रेलमगरा सीट थी।
मतदान : स्थिति
1952 में कुल मतदाता- 6 लाख 6 हजार 626
उस समय कुल मतदान हुआ-
1 लाख 65 हजार 973
मतदान प्रतिशत-27.4 रहा।
इन क्षेत्रों में चुनाव लडऩे के लिए 45 लोग मैदान में उतरे थे।





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