धोरीमन्ना ( बाड़मेर). कच्चा झोंपे, टूटी खाट, फटे-पुराने कपड़े और टूटे-फूटे बर्तन। गिड़ा में निर्धन लक्ष्मण के घर के कोने-कोने में धन था तो बस उसका भरापूरा परिवार। तीन बेटे, तीन बहुएं, पुत्री-दामाद और पत्नी। इस छप्पर पर आज दु:खों का भारी पहाड़ टूट पड़ा जब आंगन से एक-एक कर चार (एक बेटा, दो बहुएं और पत्नी ) अर्थियां उठी और गरीब दिवंगत लक्ष्मण का घर खाली हो गया।
इधर, पीहर में चार अर्थियां उठ रही थी तो उधर पड़ोस के पनोरिया गांव में बेटी-दामाद का एकसाथ अंतिम संस्कार। हादसे में घायल हुए घर के एकमात्र बुजुर्ग लाखाराम भी रात को जिंदगी की जंग हार गया और उसको भी शनिवार को ही यहां समाधि दी गई।
बाखासर के रण के 40 गांवों के 5000 से अधिक लोग इस हृदय विदारक हादसे में गरीब के परिवार को ढाढ़स बंधाने पहुंचे। पूरे रण में अधिकांश घरों में आज चूल्हे ठंडे थे। रण रो रहा था, इलाके में 100 साल में एेसा हादसा देखा ना सुना। सात लोगों की एक साथ मौत ने यहां मरघट का सन्नाटा पसार दिया है।
गिड़ा
लालाराम भगत की ढाणी में 5000 से अधिक लोग मौजूद थे। दोपहर करीब 2 बजे जैसे ही यहां पांच अर्थियां लेकर गाडि़यां रुकी मानो आसमान रो पड़ा। रुदन और दहाड़ों ने रण के कोने-कोने को चित्कारों से भर दिया और तमाम लोगों की आंखों से अविरल आंसू फूट पड़े।
परिजनों का चित्कारों से बुरा हाल और ढाढ़स बंधाने वाले अपनी रुलाई नहीं रोक पा रहे थे। सब्र करने का कहते-कहते ही बुजुर्ग खुद अपना सब्र खोकर साथ रोने लगते। करीब एक घंटे तक इस माहौल रहा। अंतिम संस्कार में जुटे हिम्मत वाले लोगांे की भी आज हिम्मत जवाब दे रही थी। अर्थियां उठते ही महिलाओं के विलाप ने झकझोर दिया
जैसे ही गरीब लक्ष्मणराम के कच्चे घर के छोटे से आंगन से पांच अर्थियां एकसाथ उठी महिलाओं की चित्कार और विलाप ने फिर एक बार सबकी आंखें फूट-फूटकर रोने लगी। अंतिम संस्कार को श्मशान में पहुंचते-पहुंचते परिजनों क साथ गांव के लोग कई बार रोए। श्मशान घाट में पांच लोगों के एक साथ अग्निसंस्कार का दृश्यहृदय विदारक था।
दो अर्थियां यहां उठी
लक्ष्मण की बेटी जोरो और दामाद भीमाराम का उनके गांव पनोरिया में दाह संस्कार हुआ। इनका गांव में एक ही चिता पर एक साथ अंतिम संस्कार हुआ। यहां पर भी माहौल गमगीन रहा।





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