अलवर. जल, जंगल व जमीन के लिहाज से वर्ष 2018 जिले के लिए ज्यादा सुकून देने वाला नहीं रहा। अवैध खनन से एक ओर कई पहाड़ गुम हो गए तो शिकार की घटनाओं ने सरिस्का में बाघों की दहाड़ को ही मंद कर दिया। वहीं बारिश का आंकड़ा भी औसत के पार नहीं जा सका। नतीजतन जिले के सबसे बड़े बांध जयसमंद नहीं भर पाया और न ही सिलीसेढ़ में चादर ही चल पाई। इतना ही नहीं, जिले के ज्यादातर बांध व नदियां सूखी रह गई। इस सुकून मिला तो बस इतना कि सरिस्का में जहां तीन टाइगर कम हुए तो तीन बाघिनों ने आठ शावकों को जन्म देकर सरिस्का के भविष्य की उम्मीदों को जगा दिया। वहीं एनजीटी ने साल के आखिर में आदेश देकर सरिस्का बाघ परियोजना व उसके एक से 10 किलोमीटर की परिधि में नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार के खनन कार्य पर रोक लगा दी। इससे सरिस्का ही नहीं, बल्कि जिले में अरावली पर्वतमाला को संजीवनी मिलने की राह खुली है।
अवैध खनन से छलनी हो गई अरावली पर्वतमाला
जिले में अनवरत अवैध खनन से अरावली पर्ववमाला छलनी हो गई। इससे जिले की कई पहाडिय़ों का अस्तित्व को मिटने के कगार पर पहुंच ही गया, वहीं अवैध खनन के पत्थर व बजरी भरकर सरपट दौड़ते ट्रैक्टर ट्रॉली व डम्पर ने सडक़ पर चलते कई बेगुनाहों की जान ले ली। पिछले दिनों ठेकड़ा गांव में क्रशर पर डीजल पहुंचाकर तेजी से लौट रहे ट्रैक्टर के चालक ने एक महिला की जान ले ली, जिससे सात बच्चे अनाथ हो गए। अवैध खनन को लेकर जनप्रतिनिधियों ने सरकार तक पत्र लिखे, प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई के आदेश जारी किए, लोगों ने आंदोलन किए, लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात वाले ही रहे। पहाडिय़ों से अवैध खनन के अलावा जिले में साल भर बजरी का अवैध परिवहन व खनन बैखोफ जारी रहा। जिम्मेदार विभाग सिर्फ मूक दर्शक ही रहे। वहीं अवैध खनन में दलाली व मंथली के खेल का भी इसी साल तब खुलासा हुआ, जब अलवर खान कार्यालय के खनि अभियंता को एसीबी ने बीकानेर में लाखों रुपए की मंथली लेते दबोच लिया। इस मामले में कई दलाल भी लपेटे में आए।





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