नई दिल्ली। कर्ज और नुकसान के बोझ में दबी एअर इंडिया को अब मोदी सरकार का सहारा मिलने वाला है। मोदी सरकार ने एअर इंडिया में 2300 करोड़ रुपए के निवेश के लिए संसद से मंजूरी मांगी है। भारत सरकार पहले एअर इंडिया में विनिवेश करना चाहती थी, लेकिन कोई खरीदार न मिलने के कारण मोदी सरकार ने इस फैसने को फिलहाल के लिए टाल दिया है।
लंबे समय से चल रही है घाटे में
सरकार एयरलाइन की महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेने में असफल हो गई थी। एअर इंडिया पर लंबे समय से लगभग 5 बिलियन डॉलर का कर्ज है, जिसे चुकाने के लिए सरकार ने एअर इंडिया की मदद करने का फैसला लिया था, लेकिन नीलामी फेल होने के बाद सरकार ने अपने इस फैसले पर अभी कोई विचार नहीं किया है।
एविएशन मिनिस्टर ने दी सलाह
जूनियर एविएशन मिनिस्टर ने पिछले सप्ताह कहा था कि एअर इंडिया को कुछ नई रणनीति बनानी होगी, जिससे वह अपने कर्ज को चुका सके और अपने कर्मचारियों को भी खुश रख सके। फिलहाल सरकार के पास एअर इंडिया के लिए चार तरह की रणनीति है, जिसमें पहला वित्तीय पैकेज है, दूसरा ब्रांडिंग रिफ्रेश है तीसरा संगठनात्मक और शासन सुधार और चौथा कर्मचारियों को प्रेरित करने की योजना है। अगर एअर इंडिया इन सभी का सही ढंग से प्रयोग करे तो कंपनी की हालत में सुधार हो सकता है और कर्मचारी भी खुश रह सकते हैं।





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