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यूरिया की कालाबाजारी: 266 रुपए का कट्टा, किसान चुका रहे 290 तक

जालोर. सहकारी समितियों में यूरिया की किल्लत के कारण यूरिया की कालाबाजारी बढ़ रही है। निजी दुकानों में ही यूरिया उपलब्ध है तथा दुकानदार मनमाने दाम वसूल रहे हैं। यहां तक कि सोसायटी में जहां यूरिया के एक कटटे की कीमत 266.50 रुपए है वहीं दुकानों में 290 से 300 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। ऐसे में किसानों को साफ तौर पर प्रति कट्टा पच्चीस से तीस रुपए ज्यादा दाम चुकाने पड़ हैं। सहकारी समितियों में नहीं मिलने से किसान दुकानों से ही यूरिया खरीदने को मजबूर है, लेकिन सरकारी स्तर पर दुकानों की निगरानी के कोई ठोस प्रबंध नहीं है। कई किसान तो ऐसे हैं, जिनके आसपास के गांवों में निजी स्तर पर भी उर्वरक की दुकान नहीं है। ऐसे में यूरिया के बड़े कस्बे तक आना पड़ रहा है। आवाजाही के साधन का खर्च और दुकानदार की ओर से वसूली जा रही मनमानी कीमत किसानों को भारी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि सहकारी समितियों की ओर से उर्वरक कंपनियों में चल रही करीब डेढ़ करोड़ रुपए की उधारी के कारण यूरिया नहीं आ रहा है। हालांकि अधिकारी यह बकाया राशि चुकाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन माल अब भी सोसायटियों तक नहीं पहुंचा है।

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थोथा दावा कर रहे जिम्मेदार
सहकारी समितियों पर निगरानी रखने वाले अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उवर्रक कंपनियों को बकाया चुका दिया है तथा यूरिया की खेप भी आ चुकी है। उप रजिस्ट्रार बताते हैं कि जालोर व आहोर की विभिन्न सोसायटियों में यूरिया पहुंचा दिया है। हकीकतन ऐसा नहीं है। कंपनियों को बकाया भले ही चुका दिया हो पर यूरिया न तो सोसायटियों तक पहुंचा है और न ही जालोर व आहोर की मार्केटिंग सहकारी समिति में।

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कीमतों पर निगरानी के प्रबंध ही नहीं
किसानों को पिछले कई दिनों से यूरिया की सख्त जरूरत है। सहकारी समितियों में नहीं मिलने पर निजी दुकानों का रूख करते हैं, लेकिन वहां दाम चुकाने पड़ रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारी दावा करते हैं कि जिले में यूरिया की किल्लत नहीं है तथा निजी दुकानों में उपलब्ध है, लेकिन निजी तौर पर किसानों को कितने दाम चुकाने पड़ रहे हैं इसकी निगरानी करने वाला कोई नहीं है।
इस तरह चुका रहे ज्यादा दाम
एक किसान ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उसने यूरिया के लिए सोसायटी में सम्पर्क किया, लेकिन वहां उपलब्ध नहीं था। इस पर निजी दुकान से यूरिया खरीदा। दुकानदार ने 290 रुपए प्रति कट्टे के हिसाब से बिल बनाया। यूरिया के साथ हुमीक एसीड लेना जरूरी था इसलिए जरूरत नहीं होने पर भी डेढ़ हजार रुपए की यह सामग्री खरीदनी पड़ी। वैैसे सोसायटी में यूरिया की प्रति कट्टा कीमत 266.50 रुपए ही है।

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इनका दावा: क्या सही, क्या गलत
सहकारी समितियां, उप रजिस्ट्रार नारायणसिंह चारण ने दावा किया कि जालोर व आहोर क्षेत्र में यूरिया आ चुका है। सोसायटियों में भी यूरिया पहुंचा दिया है। वे बताते हैं कि उर्वरक कंपनियों की उधारी चुका दी है। अब सहकारी समितियों में यूरिया की रैक आ चुकी है। जालोर व आहोर में यूरिया उपलब्ध है। जबकि, जालोर व आहोर में कार्यरत कार्मिक बताते हैं कि कंपनियों में बकाया चल रही उधारी चुका दी है पर खेप अभी नहीं पहुंची है।



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