राजसमंद. लॉटरी से शराब की दुकानें आवंटित कर राज्य सरकार का खजाना भरने के लिए आबकारी महकमे ने तैयारी शुरू कर दी है। पिछली बार शराब दुकानों के आवेदन से ही सरकार ने 27.21 करोड़ कमा लिए थे। कम आमदनी वाली दुकानों की गारंटी घटाने के लिए आबकारी विभाग ने सरकार को प्रस्ताव भेज दिए हैं। इस बार की लॉटरी के लिए आबकारी निदेशालय स्तर पर नई आबकारी नीति का मसौदा तैयार करने की कसरत शुरू हो गई है। गत वर्ष की तरह इस बार आमदनी घटने से शराब दुकानों की लॉटरी से भरपाई की उम्मीद है। राज्य सरकार को सर्वाधिक कमाई देने वाले आबकारी विभाग ने नए वित्तीय वर्ष 2019-20 में लॉटरी से शराब दुकानों का आवंटन करने का निर्णय लिया। इसके लिए वर्ष 2017 में हुई लॉटरी प्रक्रिया के आधार पर इस बार तैयारियां शुरू कर दी है। दो वर्षों में कम शराब बिक्री वाली चुनिंदा शराब दुकानों की गारंटी राशि (वार्षिक आय) कम करने के भी प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। वर्ष 2017 में भी लॉटरी से ही शराब दुकानें आवंटित की गई थी, तब 3७० दुकानों के लिए 12 हजार 96 0 आवेदन पत्र बिके थे। प्रति आवेदन का शुल्क 21 हजार रुपए तय होने से 27 करोड़ 21 लाख 6 0 हजार रुपए की आय सिर्फ आवेदन से हुई थी। नई नीति आवेदन शुल्क भी बढ़ेगा और पिछली लॉटरी के मुकाबले आवेदन पत्रों की भी ज्यादा बिक्री की संभावना है, जिससे सरकार को तीस करोड़ से ज्यादा आय की उम्मीद जताई जा रही है। इधर, आमजन की भी शराब की दुकान की लॉटरी के प्रति काफी रूचि बढऩे लगी है।
भीम में सर्वाधिक आवेदन
भीम उपखंड मुख्यालय की शराब दुकान के लिए 997 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिससे सर्वाधिक 2 करोड़ 9 लाख 37 हजार रुपए की आय हुई थी। इसके अलावा शेखावास की शराब दुकान के लिए सिर्फ 4 आवेदन प्राप्त हुए, जिससे 8 4 हजार रुपए की ही आय हुई थी। इसी तरह बोरवा दुकान में भी महज 11 आवेदन आए थे।
अब तक 91 करोड़ की आय
इस बार मौजूदा वित्तीय वर्ष में 152.53 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 30 नवम्बर 18 तक 91 करोड़ की आय हो चुकी है, जबकि चार माह शेष है। अब तक 8 2 फीसदी लक्ष्य अर्जित कर लिया और 18 फीसदी चार माह में पूरा करना मुश्किल है। ऐसे में लॉटरी से शराब दुकानें आवंटित करने से भरपाई हो जाएगी।
जागरुकता का असर
भीम-देवगढ़ क्षेत्र में शराबबंदी आंदोलन के तहत काछबली के बाद मंडावर में शराब दुकानें बंद हो गई। इसी तरह बरार, बरजाल, थानेटा सहित दर्जनभर से ज्यादा पंचायतों में शराबबंदी हो गई। इसके तहत पिछले वर्ष 127.90 करोड़ के मुकाबले 125.93 करोड़ की ही शराब बिक्री हुई, जो तय लक्ष्य के मुकाबले 1.5 फीसदी कम है। गत वर्ष मंडावर में दुकान की लॉटरी निकली थी, मगर 1 अप्रेल 18 से दुकान नहीं खुली। इसी तरह शराब की कम बिक्री के पीछे जीएसटी व नोटबंदी को भी कारण माना जा रहा है।
कम हो गई दो शराब दुकानें
ग्रामीणों ने मतदान प्रक्रिया अपनाकर काछबली व मंडावर ग्राम पंचायत में शराब की दुकानें बंद करवा दी। दोनों दुकानों से होने वाली करीब 70 से 8 0 लाख की आय घट गई, मगर सरकार ने लक्ष्य में कटौती नहीं की। ऐसे में दो दुकानें बंद होने के बावजूद उतनी ही शराब अन्य दुकानों के जरिये बेचने का अप्रत्यक्ष दबाव सरकार को आबकारी महकमे पर है।
कम हो गई दो शराब दुकानें
ग्रामीणों ने मतदान प्रक्रिया अपनाकर काछबली व मंडावर ग्राम पंचायत में शराब की दुकानें बंद करवा दी। दोनों दुकानों से होने वाली करीब 70 से 8 0 लाख की आय घट गई, मगर सरकार ने लक्ष्य में कटौती नहीं की। ऐसे में दो दुकानें बंद होने के बावजूद उतनी ही शराब अन्य दुकानों के जरिये बेचने का अप्रत्यक्ष दबाव सरकार को आबकारी महकमे पर है।





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