जालोर. रबी की सीजन में फसलों को यूरिया की जरमरत है, लेकिन किल्लत बढ़ऩे से किसान मुश्किल में हैं। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि जिले में यूरिया पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन आंकड़ों पर नजर डाले तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। जिले के लिए इस सीजन में करीब 35 मीट्रिक टन (एमटी) यूरिया चाहिए था, लेकिन मिला केवल 20 मीट्रिक टन। लगभग पंद्रह एमटी यूरिया कम आने एवं मांग बढऩे से किल्लत हो गई। वैसे यूरिया की यह खेप भी सहकारी समितियों में नहीं पहुंची। निजी दुकानों में ही यूरिया आने से किसान ज्यादा दाम चुकाने तथा यूरिया के साथ अन्य अनचाही चीजें खरीदने को भी मजबूर है।
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किसानों को चाहिए बारीक दाने
जालोर व आहोर की मार्केटिंग सोसायटी में तो यूरिया पूरी तरह साफ हो चुका है। हां, रानीवाड़ा व भीनमाल की समितियों में यूरिया उपलब्ध होना बता रहे हैं, लेकिन ज्यादातर किसान इस यूरिया को खरीदने में रुचि नहीं ले रहे। बताया जा रहा है कि यह यूरिया बड़े दाने वाला है, जिसे किसान पसंद नहीं करते। ऐसे में बारीक दानों वाला यूरिया निजी दुकानों से ही खरीदना पड़ रहा है।
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फसल में नुकसान की चिंता
खेतों में इन दिनों गेहूं, जीरा, इसबगोल, सरसो की फसल खड़ी है। कई हैैक्टेयर में खड़ी इन फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए यूरिया देना आवश्यक है। पाण देने के लिए किसी तरह सिंचाई तो कर रहे हैं, यूरिया के लिए परेशान हो रहे हैं। गांवों में संचालित सहकारी समितियों के चक्कर काटने पर भी यूरिया उपलब्ध नहीं हो रहा। किसानों को चिंता सता रही है कि अगर समय रहते यूरिया नहीं मिला तो फसल बर्बाद हो जाएगी।
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कृषि विभाग ने माना कि कम मिला यूरिया
सहकारी समितियों में यूरिया की किल्लत और निजी दुकानों में ज्यादा दाम वसूली का मामला सामने आने पर कृषि विभाग ने यूरिया की आपूर्ति को लेकर आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें स्पष्ट किया है कि 15 एमटी यूरिया कम आया है तथा जल्द ही आपूर्ति होगी। कृषि उप निदेशक आरबी. सिंह ने बताया कि जिले में रबी सीजन की फसलों के लिए अक्टूबर से माह मार्च तक यूरिया की मांग रहती है। इसके लिए यूरिया की अनुमानित मांग 35 हजार मीट्रिक टन आंकलित की गई है इसके विरुद्ध अभी तक 20 हजार 221 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति हो चुकी है। शेष आपूर्ति शीघ्र ही होने वाली है। वैसे किसानों को यूरिया की जरूरत अब है और विभाग अभी भी आपूर्ति के ही भरोसे बैठा है। ऐसे में फसल उत्पादकता पर कितना असर पड़ेगा यह सोचा जा सकता है।





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