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ट्रैक पर लेटा युवक, ऊपर से निकल गई 58 डिब्बों की मालगाड़ी, ऐसे बच गई जान

हिण्डौनसिटी। वह तो मौत को गले लगाने चला था, लेकिन मौत ने भी मुंह मोड़ लिया और जिंदगी बख्श कर चली गई। ट्रेन के सामने पटरी पर लेटने के बाद भी कुदरत को मौत देना मंजूर नहीं था।

58 डिब्बों की पूरी मालगाड़ी धड़धड़ाती उसके ऊपर से निकल गई और युवक के खरोंच तक नहीं आई। लोको पायलट ने तो स्टेशन पर वॉकी-टॉकी से युवक के ट्रेन से कटने की सूचना देे दी। मौके पर पहुंचे रेलकर्मी पटरी के बीच पड़े युवक को झंझोड़ा तो वह ऐसे उठ खड़ा हुआ मानों नींद से जागा हो।

मौत को मात देने का यह वाकया हिण्डौनसिटी रेलवे स्टेशन का है। जहां बड़े भाई से झगड़ कर दौसा जिले के सलेमपुर (महवा) निवासी दीपक जाटव (20) डाउन लाइन की पटरी के बीच लेट गया। युवक को रेलकर्मियों ने समझाइश कर घर भेज दिया।

समय दोपहर करीब 2.55 बजे। ड्यूटी स्टेशन मास्टर फतेहसिंह मीणा ने कोटा की ओर नई दिल्ली की तरफ जा रही एक्सप्रेस श्रेणी की एएजी मालगाड़ी को दु्रत गति से निकासी के लिए थ्रू सिग्नल दिए हुए थे। ट्रेन ओवर ब्रिज के नीचे से निकल कर स्टेशन की तरफ आ रही थी। इस बीच बाबा की छतरी के पास बैठा युवक फुर्ती से पटरी के बीच लेट गया। यकायक युवक के ट्रैक पर आने से हड़बड़ाया लोको पायलट रामसिंह मीणा इमरजेंसी हॉर्न भी नहीं बजा पाया।

करीब 100 मीटर आगे प्लेटफार्म दो पर ट्रेन की निकासी को हरी झंडी से ऑल राइट (सुरक्षित) दिखा रहे प्वांट्समैन इमामुद्दीन गद्दी को पायलट ने युवक के रन ओवर (ट्रेन से कटने) होने इशारा किया। साथ ही वॉकी-टॉकी से ड्यूटी स्टेशन मास्टर फतेहसिंह को भी सूचित किया। स्टेशन मास्टर के निर्देेश पर प्वाइंंट्समैन मौके की ओर दौड़ पड़ा। वहां ट्र्रैक के बीचोंबीच एक युवक पड़ा था।

उसे झंझोड़ा तो वह उठ बैठा। बाद में उसे पकड़ के ट्रैक से दूर लाकर बैठा दिया।मांजरा देख आस-पास मौजूद लोग मौके पर जमा हो गए और घरेलू मामलों में धैर्य रखने की नसीहत दे युवक को घर भेज दिया।

मौत के मुंह में रहा डेढ़ मिनट
स्टेशन मास्टर फतेहसिंह मीणा ने बताया कि 70-80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से मालगाड़ी के 58 डिब्बों को गुजरने से एक मिनट से डेढ़ मिनट का समय लगा। ट्रैक पर लेटा युवक डेढ़ मिनट तक मौत के मुंह में रहा। पहियों के वैक्यूम से यदि उसकी गर्म जैकेट जरा भी डिब्बे के किसी पुर्जे में उलझ सकती थी। लेकिन युवक के सीधे लेटे रहने से हवा के झौंकों के बाद भी कपड़ों के ट्रेन में नहीं उलझने से वह बच गया।



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