कई क्षत्रप ऐसे भी है जिनकी राजनीतिक जमीन चुनावों के बाद खिसक गई है।
चुनाव परिणामों के बाद हर तरह के विश्लेषण किए जा रहे हैं। कोई इसे राहुल का उदय तो कोई मोदी लहर खत्म होने की बात कह रहा है। लेकिन केवल पीएम मोदी या भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अकेले नहीं है जिन्हें विधानसभा चुनावों की हार से पीड़ा हुई हो। कई क्षत्रप ऐसे भी है जिनकी राजनीतिक जमीन चुनावों के बाद खिसक गई है।
1. वसुंधरा राजे
5 साल के कार्यकाल के दौरान कई बार वसुंधरा राजे को हटाने की मांग पार्टी के अंदरखाने ही उठती रही लेकिन भाजपा ने राजे के नेतृत्व में ही यह चुनाव लड़ा। इस लिहाज से उनका राजनीतिक भविष्य भी दांव पर है। राजे को केंद्र में भेजकर प्रदेश की कमान किसी अन्य नेता को देने की भी चर्चा हैं।
2. हनुमान बेनीवाल
पश्चिमी राजस्थान के जाट नेता अपने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान वसुंधरा और गहलोत पर हमले करते हुए नजर आए। बेनीवाल की वसुंधरा को हटाने की तमन्ना तो जनता ने पूरी करदी लेकिन गहलोत के दोबारा मुख्यमंत्री बनने से बेनीवाल को करारा झटका लगा है। बेनीवाल यहां तक कह गए थे कि अगर कांग्रेस सचिन पायलट को सीएम बनाती है तो वे कांग्रेस का समर्थन कर सकते हैं। बेनीवाल की पार्टी ने राज्य में 3 सीटों पर जीत हासिल की है।
3. घनश्याम तिवारी
पूर्व भाजपा नेता के लिए यह चुनाव ' न माया मिली न रामÓ जैसा ही रहा। भाजपा छोड़ नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा लेकिन न खुद जीते न किसी को जिता पाए। भाजपा में भी अब उनके लिए दरवाजे बंद से हो गए हैं।
4. किरोड़ी लाल मीणा
चुनाव पूर्व घर वापसी करने वाले किरोड़ी लाल के लिए भी यह चुनाव किसी बुरे सपने जैसा ही था। एक समय कांग्रेस को अपने इशारों पर नचाकर पत्नी को मंत्री बनाने वाले मीणा अपने उन्हें जीत भी दिला नहीं पाए। उनके कई समर्थक उम्मीदवार भी चुनाव हार गए ।
5. बीडी अग्रवाल
2013 में 3 सीटें जीतने वाली जमींदारा पार्टी कांग्रेस की लहर में इस बार खाता भी नहीं खोल सकी। पार्टी के सभी उम्मीदवार हार गए। चुनाव पूर्व पार्टी की एक विधायक के कांग्रेस में शामिल हो गई थी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बेटी कामिनी जिंदल को भी चुनाव नहीं जिता सके।
6. मीठालाल जैन
पूर्व सांसद मीठालाल जैन की युवा शक्ति पार्टी ने 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी खाता खोलने में भी नाकामयाब रही। खास बात यह रही कि गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल में भी जैन की पार्टी के उम्मीदवारों के लिए रोड शो और रैलिया की थी।





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