बाड़मेर.
बहुचर्चित फर्जी पट्टा प्रकरण के बाद विवादों से घिरी रही नगर परिषद पूरी तरह कंगाल हो चुकी है। खजाने में महज 25 लाख रुपए बचे हंै और आय के स्त्रोत को लेकर जिम्मेदारों ने मिट्टी डाल दी है। यही स्थिति रही तो अगले कुछ माह में कर्मचारियों को वेतन देने लाले पड़ जाएंगे। हालांकि नगर परिषद ने अब यूडी टैक्स वसूलना शुरू किया है। महावीर नगर में आवासीय कॉलोनी में रह रहे 80 लोगो को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में हवाला दिया है कि 300 वर्ग गज से ज्यादा मकान है, इसलिए टैक्स जमा किया जाए।
राज्य में कांग्रेस की नई सरकार बनने के बाद बाड़मेर नगर परिषद के कांग्रेस बोर्ड को विकास व बजट की उम्मीद जगी है। वहीं शहर के अधूरे विकास कार्य अब पूरा होने की संभावना है। नगर परिषद ने अप्रेल 2015 के बाद एक भी पट्टा जारी नहीं किया है। वहीं भूखण्ड नियमन पर रोक लगी हुई है। इतना ही नही 100 से ज्यादा आवेदकों ने नियमानुसार तय फीस भी जमा करवा दी। इसके बावजूद उन्हें पट्टा नसीब नहीं हो पाया है। यहां भूमि शाखा में करीब ढाई हजार पत्रावलियां धूल फांक रही है। इसके बावजूद कोई निर्णय नही निकल रहा है। उल्लेखनीय है कि भाजपा सरकार के चार साल के कार्यलाय में आठ आयुक्त बदल दिए। कांग्रेस बोर्ड ने इसे मुद्दा बनाते हुए विकास व पट्टों पर ही रोक लगा दी।
सात साल अटक गई कॉलोनियां
शहर के गडरा सर्कल के पास नगर परिषद ने सात पहले महाराणा प्रताप व सिद्धार्थ नगर नाम से दो कॉलोनियों को विकसित किया। यहां नगर परिषद ने लाखों रुपए खर्च कर भूखण्ड आवंटन की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन उसके बाद अधिकारियों की अंधेरगर्दी के चलते फाइलों पर कुण्डली मार दी। अब यह कॉलोनी विकसित होने की बजाय महज दिखावा बन गई है। वहीं भूमि व दुकानों की नीलामी को लेकर भी परिषद क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ है।
अब यह आय बढ़ाने की तैयारी
- यूडी टैक्स के लिए 80 नोटिस जारी
- दुकानों की नीलामी की तैयारियां शुरू
- अब पट्टे भी होंगे जारी
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नगर परिषद खजाने की स्थिति
- 25 लाख रुपए खजाने में जमा
- 8 करोड़ रुपए की एफडी





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