अजमेर/ब्यावर/मदनगंज-किशनगढ़.
दुनिया की सबसे पुरानी अरावली पर्वतमाला पर जबरदस्त खतरा मंडरा रहा है। यहां बेखौफ खुदाई जारी है। खनन विभाग और सरकार आंख मूंदकर तमाशा देख रहे हैं। अगर यह पर्वतमाला खत्म हुई तो इसका पूरे भारत पर असर पड़ेगा। किशनगढ़ के खोड़ा गणेश रोड के पास, अजमेर में अजयसर, हाथीखेड़ा, लोहागल और ब्यावर के मगरा क्षेत्र में अरावली को छलनी किया जा रहा है।
ट्रेक्टर-ट्रॉली भरकर सप्लाई
किशनगढ़ में न्यू हाउसिंग बोर्ड विस्तार में राजस्थान आवासन मंडल की ओर से विभिन्न आय वर्ग के लोगों के लिए मकान बनाए गए हैं। इसमें से कुछ मकानों का आवंटन हो चुका है, तो कुछ का शेष है। इसके बावजूद भी हाउसिंग बोर्ड के पीछे पहाड़ी पर खनन जारी है। इसी तरह अजमेर में हाथीखेड़ा, अजयसर और लोहागल क्षेत्र से प्रतिदिन कई ट्रेक्टर-ट्रॉली भरकर सप्लाई करते हैं। इससे पहाड़ जगह-जगह से छलनी हो गया है। इसी प्रकार उसके पास ही बजरी का अवैध खनन हो रहा है। खनन पर कोई रोक-टोक नहीं होने के कारण खननकर्ताओं के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
बजरी के टीले हो रहे गायब
जिले में तीस साल पहले तक पहाड़ी क्षेत्र में कई जगह बजरी और रेत के टीले थे। खननकर्ताओं ने उसे भी चट कर दिया है। वहां पर जेसीबी से ट्रेक्टर-ट्रॉली में इसका खनन पर परिवहन किया जाता है। रेत को भी बजरी बताकर बेच रहे हैं।
रात में होता है खनन
पहाड़ पर रात में पत्थर तोड़े जाते हैं। यहां से अलसुबह ही पत्थरों की सप्लाई की जाती है। दोपहर तक तो सन्नाटा पसर जाता है। वहीं बजरी का खनन और परिवहन रात्रि के समय ही होता है। इसके कारण देर शाम से सुबह तक ट्रेक्टर-ट्रॉली और जेसीबी की आवाजाही बनी रहती है।
जगह-जगह बंद कर रखा है रास्ता
खननकर्ताओं के कारण यहां पर कुछ वर्ष पहले विस्थापित गांव के लोगों ने जगह-जगह रास्ते बंद कर रखे हैं। क्षेत्रवासियों ने बताया कि रात-दिन तेज गति से बजरी और पत्थरों से भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली दौड़ते हैं। इसके कारण हादसा होने का अंदेशा बना रहता है। इसके चलते रास्ते बंद कर रखे हैं।





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