जैसलमेर. एक्वायर्ड इम्युनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम (एड्स) घातक रोग है, जिसने दुनिया भर को हिला कर रख दिया।इस रोग ने बीते दशकों के दौरान जैसलमेर जैसे सीमावर्ती इलाके में भी पांव पसार लिए। इसकी चपेट में आए लोग अगर मनोबल को गिरने नहीं दे और चिकित्सकों की ओर से सुझाई गई सावधानियों की पालना करे तो वे न केवल लम्बी अवधि तक स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि सामान्य जीवन भी जी सकते हैं। वैसे जैसलमेर के मामले में यह माना जाता है कि यहां पर्यटन की बढ़ोतरी के साथ इस रोग की पहुंच हुई। ऐसे ही बाहरी क्ष् ोत्रों में कामकाज के सिलसिले में रहने के कारण यह जिले के कई लोगों को ग्रस्त कर चुका है।
अस्पताल में दी जा रही सुविधा: जिला मुख्यालय स्थित जवाहर चिकित्सालय में एड्स रोगियों की जांच और उन्हें दवा सुलभ करवाने के लिए एकीकृत परामर्श एवं जांच केंद्र (आईसीटीसी) की स्थापना की हुई है।
जहां सप्ताह में दो बार दवा दी जाती है। वैसे यह कड़वी सच्चाई है कि जिस एड्स रोग का दुनिया भर के वैज्ञानिक और चिकित्सक स्थायी इलाज नहीं ढूंढ़ पाए हैं, यह घातक रोग जैसलमेर जैसे पारम्परिक जिले में पांव पसार चुका है। जिले में इस रोग से ग्रसित लोगों की संख्या एक सौ का आंकड़ा पार कर चुका है।
नियमित जांच की सुविधा
साल 2004 से जैसलमेर के राजकीय जवाहर चिकित्सालय में एड्स अथवा एचआइवी की नियमित जांच करवाई जा रही है। इस केन्द्र का नाम समेकित जांच व परामर्श केन्द्र रखा गया है। इसमें भी दो भाग हैं। एक में सामान्य लोगों जो जांच करवाना चाहते हैं उनकी जांच की सुविधा है। उनके लिए महिला व पुरुष काउंसलर उपलब्ध है। गर्भवती महिलाओं की भी जांच करने के बाद उनके लिए काउंसलिंग की सुविधा है। मरीज के विवरण व उपचार की प्रक्रिया को पूर्णतया गोपनीय रखा जाता है। अगर कोई मरीज एचआइवी पोजिटिव पाया जाता है तो उसकी जांच के बाद फिर से काउंसलिंग की जाती है। उसका मनोबल बढ़ाया जाता है। उसे समझाया जाता है कि वह कैसे खुद को और दूसरों को सुरक्षित रखे। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन राष्ट्रीय स्तर पर व राजकीय स्तर पर राजस्थान एड्स कंट्रोल सोसायिटी के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रम सरकार चला रही है। एड्स से संबधित कुल 6 कार्यक्रम चल रहे हैं। इनमें मरीज की विभिन्न चरणों में समय समय पर उसकी जांच व देखभाल की जाती है।
कब से चल रहा सिलसिला
एड्स जैसे गंभीर रोग की शुरूआत जैसलमेर जिले में 1990 के दशक में हो गई थी। बाद में यह निरंतर बढ़ता गया है। इसका आगाज जैसलमेर जैसे पिछड़े और सुसंस्कृत जिले में होना तब काफी चौंका गया था। दरअसल बढ़ते पर्यटन की वजह से जैसलमेर के लोग विशेषकर ऊंट सफारी के काम से जुड़े अनपढ़ व्यक्तियों ने विदेशी महिलाओं से असुरक्षित यौन संबंध बनाने की खता की और उनमें से कई जने एड्स की चपेट में आ गए। इस संबंध में राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से किए गए अध्ययन में भी पर्यटकों के सम्पर्क में आने से जैसलमेर के ऊंट सवारों के तेजी से एचआइवी पॉजिटिव होने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे ही रोजगार के सिलसिले में जिले से बाहर बड़े अंतराल के लिए जाने वाले कई जने भी अपने साथ एड्स रोग का अभिशाप लेकर यहां आए। इसके चलते जिले में कुछ महिलाएं भी एचआईवी से संक्रमित हो गईं।
जांच और परामर्श की सुविधा
&एचआइवी की जांच और परामर्श की सुविधा प्रत्येक चिकित्सा केंद्र स्तर पर उपलब्ध है। पोजिटिव मरीज को समयबद्ध ढंग से दवा दी जाती है। जांच के बाद मरीज का रिकॉर्ड सुरक्षित रखकर उसे समेकित जांच योजना से जोड़ कर उसका उपचार शुरू कर दिया जाता है। उपचार के बाद मरीज सुरक्षित जीवन व्यतीत कर सकता है। कई मरीज सालों से स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं है।
- डॉ. दामोदर खत्री, पैथोलॉजिस्ट, जवाहर चिकित्सालय, जैसलमेर
फैक्ट फाइल
1990 के दशक में हुई शुरूआत
100 से ज्यादा एड्स रोगी हैं जिले में
०2 दिन सप्ताह के दवा वितरण के लिए निर्धारित
1981 में चिह्नित हुआ दुनिया का पहला एड्स रोगी





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