नाचना. जिले की बड़ी ग्राम पंचायतों में शुमार नाचना ग्राम पंचायत मुख्यालय पर दमकल वाहन नहीं होने के कारण आए दिन होने वाली आग की घटनाओं के दौरान ग्रामीणों को खासी परेशानी होती है। गांव सहित आसपास क्षेत्र में आग पर काबू करने के लिए माकूल प्रबंध नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को आग लगने पर अपने स्तर पर प्रयास करने पड़ते है। गौरतलब है कि नाचना इन्दिरा गांधी नहर के पास बसा हुआ है। नहर के दोनों तरफ वन पट्टी में लाखों पेड़ पौधे लगे हुए है। गर्मी के मौसम में पेड़ों के पत्ते सूखकर बिखर जाते है। इसी प्रकार इन पेड़ पौधों के बीच से विद्युत लाइन निकलती है। कई बार इन तारों में शॉर्ट सर्किट अथवा किसी बीड़ी, सिगरेट या माचिस की तिली की चिंगारी से आग लग जाती है, तो वह सूखे पत्तों, पेड़ पौधों के कारण आग दावानल का रूप ले लेती है। जिसे काबू करने के लिए ग्रामीणों को कई दिनों तक मशक्कत करनी पड़ती है। यहां दमकल नहीं होने के कारण पोकरण व जैसलमेर से अग्निशमन वाहन बुलाना पड़ता है। जिसमें तीन से चार घंटे का समय लगता है। तब तक आग विकराल रूप ले लेती है तथा काबू करना मुश्किल हो जाता है।
पूर्व में हो चुकी है घटनाएं
- 18 मार्च 2013 को अवाय व चिन्नू के बीच नहर की वन पट्टी में
- 17 अप्रेल 2013 को नाचना फांटा के पास वन पट्टी में
- 1 मई 2013 को भदडिय़ा के पास वन पट्टी में
- 4 मई 2013 को नाचना के पास वन पट्टी में
- 21 मई 2016 को नाचना के पास वन पट्टी में
- 23 मई 2016 को नाचना के पास इन्दिरा गांधी नहर 1251 आरडी वन पट्टी में
- 29 मार्च 2018 को नाचना फांटा के पास तीन किमी में धधका था दावानल
झेलनी पड़ रही परेशानी
नाचना में दमकल की व्यवस्था नहीं है। क्षेत्र में कहीं भी आग की घटना होने पर शीघ्र काबू नहीं पाया जा सकता और खासी मशक्कत करनी पड़ती है। जिससे ग्रामीणों सहित आमजन को परेशानी होती है।
राजेन्द्र सैन, व्यवसायी, नाचना
आग की घटना के दौरान नहर किनारे निवास कर रहे ग्रामीणों व किसानों पर आफत के बादल मंडराने लगते है। पोकरण व जैसलमेर से दमकलों के यहां पहुंचने तक काफी देर हो जाती है। वन विभाग के पास आग पर काबू करने के पर्याप्त संसाधन होने चाहिए तथा नाचना में अग्निशमन उपलब्ध करवाना चाहिए।
महिपालसिंह, किसान, भदडिय़ा।





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