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एक दशक बाद चूरू में कांग्रेस ने फिर लगाया जीत का चौका, राठौड़ कांटे की टक्टर से जीते

चूरू.

15वीं विधानसभा के गठन के लिए मंगलवार को मतगणना हुई। जिले की छह विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने परचम लहराया है। एक दशक बाद कांग्रेस को पछाड़कर चार सीटों पर कब्जा जमा लिया। जिला मुख्याल पर लोहिया पीजी कॉलेज में हुई मतगणना में तारानगर, सादुलपुर, सरदारशहर और सुजानगढ़ में कांग्रेस को जीत मिली। जबकि चूरू और रतनगढ़ की सीट भाजपा के खाते में गई। जीत की घोषणा के साथ ही कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई।

 

इसमें एक दिग्गज नेता को हार का सामना करना पड़ा लेकिन दूसरे दिग्गज ने अपनी सीट बचाने में कामयाबी हासिल कर ली। चूरू विधानसभा क्षेत्र से प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले भाजपा प्रत्याशी राजेन्द्र राठौड़ ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी रफीक मंडेलिया को कड़े मुकाबले में १८५० मतों से पराजित कर अपनी सीट को बरकरार रखा। राठौड़ अब तक सात बार लगातार चुनाव जीत चुके हैं। जिसमें २००८ का चुनाव भी शामिल है। जिसे राठौड़ ने तारानगर विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था। वहीं रतनगढ़ में भाजपा प्रत्याशी अभिनेष महर्षि ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय मैदान में ताल ठोकने वाले पूसाराम गोदारा को 11 हजार 881 मतों से हराकर सीट को एक बार फिर भाजपा की झोली में डाल दिया है। इस सीट पर पहले त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा था।

 

इसी प्रकार सुजानगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी भंवरलाल मेघवाल का मुकाबला भाजपा के खेमाराम मेघवाल से रहा। यहां निर्दलीय प्रत्याशी संतोष मेघवाल तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस के भंवरलाल ने भाजपा के खेमाराम को ३८७४९ मतों से पराजित कर जीत दर्ज की।

 

तारानगर विधानसभा क्षेत्र में छह बार सांसद रह चुके नरेन्द्र बुडानिया भी सीट कांग्रेस के खाते में डालने में कामयाब रहे। 2013 में यह सीट भाजपा के खाते में थी। बुडानिया ने यहां पर भाजपा प्रत्याशी राकेश जांगिड़ को 12 हजार 555 मतों पराजित किया। यहां कांग्रेस से बगावत कर मैदान में उतरे निर्दलीय डा. सीएस बैद तीसरे नंबर पर रहे।

 

सरदारशहर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस अपनी सीट को बचाने में एक बार फिर कामयाब रही। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी भंवरलाल शर्मा ने आमने-सामने के मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी अशोक पींचा को १६ हजार ८१६ मतों से हाराया। इसी प्रकार सादुलपुर विधानसभा क्षेत्र में भी मुकाबला रोचक रहा है। यहां बसपा, कांग्रेस में आमने-सामने की टक्कर रही। जबकि भाजपा प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे। कांग्रेस की कृष्णा पूनिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा के मनोज न्यांंगली को 18 हजार 84 मतों से हराकर अपनी पहली जीत का खाता खोला। पूनिया 2013 के चुनाव में हार चुकी थी। दूसरे नंबर पर यहां बसपा प्रत्याशी मनोज न्यांगली रहे। न्यांगली पिछली बार विधायक थे।

 

जमानत नहीं बचा पाए रिणवा व पुजारी


सबसे रोचक बात तो ये है कि जिले में हॉट सीट के नाम से जानी रही रतनगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा से बागी बनकर मैदान में उतरे राजकुमार रिणवा अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। लगातार तीन चुनाव जीतने के बाद चौथे चुनाव में उन्हें करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। यही नहीं यहां कांग्रेस प्रत्याशी भंवरलाल पुजारी भी अपनी जमानत नहीं बचा पाए। रतनगढ़ में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने रिणवा की टिकट काटकर उनके स्थान पर अभिनेष महर्षि को मैदान में उतारा था। महर्षि ने ये जीत भाजपा के खाते में डाली।

 

पिछली बार चार सीटों पर थी भाजपा


2013 में १४वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने चार स्थानों पर जीत दर्ज की थी। इसमें चूरू से राजेन्द्र राठौड़, सुजानगढ़ से खेमाराम मेघवाल, रतनगढ़ राजकुमार रिणवा और तारानगर से जयनारायण पूनिया भाजपा से जीते थे। जबकि सादुलपुर से बसपा के मनोज न्यांगली और सरदारशहर से कांग्रेस से भंवरलाल शर्मा विधायक चुने गए थे। इस बार न्यांगली, खेमाराम मेघवाल के हाथ से ये सीट निकल गई।

भाजपा ने खोई दो सीटें
इस बार चुनाव में हुए रोचक मुकाबले में भाजपा ने अपने खाते की दो सीट खो दी। इन सीटों पर कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाने में कामयाबी हासिल कर ली है। भाजपा से तारानगर और सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र छिन गया। यहां कांग्रेस ने जीत दर्ज कर ली।



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