जीतेश रावल@ जालोर. अन्य राज्यों में रहने वाले प्रवासियों को मतदान के लिए मारवाड़ आना है तो बिना किसी खर्चे के आ सकते हैं और मतदान दिवस पर अपने मताधिकार का उपयोग कर वापस लौट सकते हैं। इसके लिए उनको आने-जाने का साधन और रास्ते में खाना-पीना भी मिलेगा। बात चौंकाने वाली पर हकीकत है। अपने पक्ष में अधिकाधिक मतदान के लिए प्रत्याशियों ने कई राज्यों व प्रमुख शहरों में बसें लगाई हैं। इनमें बैठकर प्रवासी मारवाड़ आएंगे तथा मतदान कर लौट जाएंगे। प्रवासियों को लाने के लिए बसों की व्यवस्था भी हो गई है। इसके लिए प्रत्याशियों ने अपने प्रमुख पदाधिकारियों को उन शहरों में सम्पर्क करने का जिम्मा सौंपा है। बस प्रभारी नियुक्त कर उनके मोबाइल नम्बर भी जारी किए गए हैं, ताकि आने-जाने में असुविधा न हो। मैसेज वायरल किए जा रहे हैं, जिससे कि कोई मारवाड़ आने का इच्छुक हो तो उस नम्बर पर सम्पर्क कर सके।
ज्यादातर नौकरीपेशा आते हैं
नौकरी पेशा प्रवासी मतदान दिवस पर ज्यादा संख्या में आते हैं। व्यवसायरत प्रवासियों के लिए आना मुश्किल होता है। अपने नौकरों को मारवाड़ भेजने की छुट्टी देने से धंधे में दो-चार दिन के लिए मैनपॉवर की कमी हो जाती है। ऐसे में व्यवसाय संभालने के लिए वे लोग वहीं रहते हैं। ज्यादा ही जरूरत हो तो परिवार के कुछ युवा सदस्यों को भेज देते हैं।
प्रवासियों का एक बड़ा वोट बैंक
क्षेत्र के अधिकतर लोग रोजगार के लिए भले ही अन्य प्रदेशों में रहते हो, लेकिन उनका आना-जाना बराबर बना रहता है। उनके परिवार और वोटर कार्ड भी यहीं बने हुए हैं। ऐसे में प्रवासियों का एक बड़ा वोट बैंक है। इन पर पकड़ बनाए रखने से प्रत्याशी को न केवल प्रवासी का वोट मिल सेता है बल्कि उसके परिवार के वोट भी कब्जे में आ सकते हैं। ऐसे में प्रवासी वोटर्स को आकर्षित करना फायदे का सौदा साबित होता है।
गुजरात से लेकर दक्षिणी सीमा तक
जालोर व सिरोही जिले के ज्यादातर लोग गुजरात से लेकर दक्षिण भारत की सीमा तक बसे हुए हैं। इनमें से अधिकतर चेन्नई, कोयम्बटूर, मदुराई, बंगलूरू, हैदराबाद, विजयवाड़ा, बेल्लारी, हुबली समेत दक्षिण भारतीय राज्यों के विभिन्न जिलों में प्रवासरत हैं। पूना, मुम्बई, अहमदाबाद, सूरत, वापी, वडोदरा समेत महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात में रहने वालों की संख्या भी ज्यादा है। राजस्थान के विभिन्न जिलों एवं दिल्ली, कोलकाता समेत कई राज्यों में मारवाड़ी व्यवसायरत है।
वोट के बहाने मिलने का मौका
सैकड़ों के किमी का सफर होने से बसों की व्यवस्था अभी से कर दी गई, ताकि वोटर्स मतदान दिवस पर बूथ पर पहुंच सके। लम्बे सफर की थकान मिटाने एवं परिजनों से मिलने के लिए गांव में एक दिन का विश्राम किया जाएगा। इसके बाद उसी बस में वापस लौटने का इंतजाम भी रहेगा। मतदान के बहाने ही सही, लेकिन जेब पर भार पड़े बगैर परिजनों से मिलने का मौका कोई नहीं छोड़ता। ऐसे में बस रवानागी से पहले ही ठसाठस भर जाती है।





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