सवाईमाधोपुर/बाटोदा. 'सेहत का गिलास, हर बच्चे के हाथ टैग लाइन के साथ शुरू की गई अन्नपूर्णा दूध योजना बजट के अभाव में खटाई में पड़ती नजर आ रही है। स्थिति ये है कि स्कूलों में पिछले तीन महीने से दूध का बजट तक जमा नहीं हुआ है। पिछले तीन महीने से 1105 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, मदरसा व संस्कृत स्कूलों में 2 करोड़ 55 लाख 97 हजार रुपए की राशि बकाया चल रही है। दरअसल, सरकार व शिक्षा विभाग ने दो जुलाई से पहली से आठवीं कक्षा तक अध्ययनरत विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के लिए अन्नपूर्णा दुग्ध योजना शुरू की थी। योजना के तहत जिलेभर के 1105 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, मदरसा में अध्यनरत एक लाख 10 हजार बच्चों को दूध वितरण किया जाना था। इनमें पहली कक्षा 5वीं तक 74 हजार एवं छठीं से आठवीं तक 36 हजार विद्यार्थी शामिल हैं। योजना में अब बजट का रोड़ा प्रमुख समस्या बना है। स्थिति ये है कि कई प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में संस्था प्रधानों को उधार दूध मंगवाकर योजना का संचालन करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार यदि समय रहते राशि भुगतान नहीं किया गया तो संबंधित विद्यालयों में दूध सप्लाई तक बंद कर सकते हैं। इससे विद्यालय प्रशासन को खासी परेशानी झेलनी पड़ेगी। यह स्थिति चौथकाबरवाड़ा, बामनवास, खण्डार, गंगापुरसिटी, सवाईमाधोपुर में बनी है।
यह है बकाया बजट की स्थिति
शिक्षा विभाग के अनुसार जुलाई-अगस्त का अन्नापूर्णा दूग्ध योजना का भुगतान एक करोड़ 27 लाख रुपए प्रथम किश्त आ गई थी। इसके बाद स्कूलों में यह राशि तो जमा हो गई थी, लेकिन सितम्बर, अक्टूबर व नवम्बर माह का करीब 2 करोड़ 55 लाख 97 हजार रुपए की राशि बकाया चल रही है। ऐसे में दुग्ध डेयरी व पार्लरों को भी भुगतान के अभाव में आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
संस्था प्रधान कर रहे है जेबे ढीली
बामनवास क्षेत्र के राउप्रावि निवालिया की ढाणी के संस्था प्रधान विनोद त्रिवेदी, जीवद के राप्रावि के संस्था प्रधान भीमसिंह मीणा, राप्रावि क्यारदा की ढाणी के संस्था प्रधान गजेन्द्रङ्क्षसह, राउप्रावि बाढ़ बंधड़ा के संस्था प्रधान पुरूषोत्तम कुमार अग्रवाल आदि ने बताया कि पिछले तीन महीने से स्कूलों में अन्नापूर्णा दुग्ध योजना की राशि जमा नहीं हो पाई है। इससे दूध विक्रेताओं को स्वयं के स्तर पर ही राशि देनी पड़ रही है। शिक्षा विभाग को कई बार अवगत कराया, लेकिन अभी तक खातों में राशि जमा नहीं हो पाई है। इससे आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
तीन माह से बकाया राशि
बाटोदा क्षेत्र में बजट राशि नहीं होने से विद्यालयों पर दूध का कर्जा बढ़ गया है। कई स्कूलों के संस्था प्रधान दूध विक्रेताओं को स्वयं के स्तर पर राशि चुका रहे है। सरकार की इस योजना के तहत दूध का विद्यालय को अग्रिम भुगतान करने के आदेश थे, लेकिन विभाग की उदासीनता के चलते यहां संचालित स्कूलों में पिछले 3 माह से बजट नहीं आया है। ऐसे में क्षेत्र के संस्था प्रधानों ने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर शीघ्र भुगतान कराने की मांग की है।
स्कूलों में दुग्ध योजना के तहत बकाया राशि के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट बनाकर भेज दी है। चुनाव के चलते बजट की राशि जमा नहीं हुई थी। शीघ्र ही दुग्ध योजना व पोषाहार आदि की राशि स्कूलों के खाते में जमा होगी।
कमला बारवाल, मुख्य ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी, सवाईमाधोपुर





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