बालोतरा. पोपलीन वस्त्र उद्योग के रूप में विख्यात दो कस्बों बालोतरा व जसोल को जोडऩे वाली सड़क जर्जर है। इस पर डद्यमी, मजदूर, वाहन चालक हर कोई परेशान है। जरूरत है तो बस इतनी की इस चंद किमी की सड़क का डामरीकरण हो जाए, लेकिन ना तो सरकार ध्यान दे रही और ना ही जनप्रतिनिधि सही ढंग से पैरवी कर रहे हैं। इसका खामियाजा लोगों को कई सालों से भुगतना पड़ रहा है।
नगर के रेलवे चौथी फाटक से जसोल को लूनी नदी होते जोडऩे वाली डामर व ग्रेवल सड़क बदहाल है। इससे आवागमन को लेकर हर दिन हजारों वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ती है। संतुलन बिगडऩे पर वाहन के पलटने से चालक व सवार चोटिल, घायल होते हैं। परेशान आमजन व व्यापारी नगर परिषद व ग्राम पंचायत प्रशासन से कई बार सड़क मरम्मत की मांग कर चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
गौरतलब है कि सड़क के दोनों बड़ी संख्या में वस्त्र कारखाने हैं। इस पर आमजन व उद्यमियों को आवागमन में अच्छी सुविधा उपलब्ध करवाने को लेकर कई वर्ष पूर्व नगर परिषद ने लूनी नदी के किनारे से डामर सड़क व ग्राम पंचायत जसोल ने नदी के भाग में ग्रेवल सड़क बनाई थी। इससे कई वर्ष तक बालोतरा, जसोल व क्षेत्र के लोगों व उद्यमियों को आवागमन में अच्छी सुविधा मिली।
नगर परिषद ने निर्माण बाद एक बार भी इसकी मरम्मत नहीं की तो अतिवृष्टि से नदी में पानी के बहाव से गे्रवल सड़क इसके साथ बह गई। आवागमन की महत्वपूर्ण सड़क होने पर सीईटीपी जसोल ने स्वयं के खर्च से लूनी नदी के भाग में दुबारा ग्रेवल सड़क बनाई, लेकिन नदी में फिर से पानी केबहाव से ग्रेवल सड़क बह गई। इसके बाद इस सड़क का न तो नगरपरिषद ने निर्माण करवाया और ना ही ग्राम पंचायत ने सुध ली। इस पर आवागमन को लेकर हर दिन हजारों जनों को परेशानियां उठानी पड़ती हैं।
वाहन फंसने से परेशानी-
सड़क पर जमा रेत में वाहन धंसते हैं। कई बार संतुलन बिगडऩे पर पलटते हैं। इससे चालक व सवार चोटिल, घायल होते हैं। कारखानों में रात्रि काम के बाद घरों को जाने वाले मजदूरों को सर्वाधिक परेशानी उठानी पड़ती है।
सड़क क्षतिग्रस्त, आवागमन में दिक्कत -
रेलवे चौथी फाटक से लूनी नदी होते हुए जसोल जाने वाली सड़क पूर्णरूप से टूट चुकी है। पैदल चलने लायक नहीं है। हर दिन हजारों जने परेशानी उठाते हैं। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। - जितेन्द्र हुंडिया
नहीं ले रहे सुध-
रेलवे चौथी फाटक से जसोल जाने वाली सड़क कई वर्ष पूर्व ही टूट गई थी। इसका निर्माण तो दूर मरम्मत तक नहीं की जा रही है। महत्वपूर्ण सड़क होने के बावजूद इसकी सुध नहीं ली जा रही है।
- नरेन्द्र चारण





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