पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट
पाली। सियासी उठापटक का असर चुनावी मुद्दों तक दिखाई दे रहा है। विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले जनता की जो समस्याएं मुदद बनकर उठी थी, वे जीत-हार के शोर में न जाने कहां खो गई। पाली विधानसभा क्षेत्र की जनता को जिन मुश्किलों से रोज जूझना पड़ता है उनके समाधान का वादा कोई नहीं कर रहा। चुनावी रण में ताल ठोक रहे प्रत्याशी जनता को लोक लुभावन चासनी में डूबे वायदे परोसने में जुटे है। लेकिन, जनता पिछले कई सालों से जिस मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटा रही थी वे अभी तक पूरे नहीं हुए है। राजस्थान पत्रिका की टीम ने जनता के बीच जाकर उनके मुद्दों, मसलों और परेशानियों को जाना और तैयार किया पब्लिक एजेंडा। प्रस्तुत है जन एजेंडे में शुमार चार मुद्दे जिन पर जनता समाधान चाहती है।
अतिक्रमण : राजनीतिक संरक्षण में गहरी होती जड़े
शहर का भीतरी बाजार सालों से अस्थायी अतिक्रमण की चपेट में है। आलम यह है कि वहां कभी आग लगने की घटना हो जाए तो दमकल को संकरी गलियों से होते हुए मौके तक पहुंचने में भी काफी समय लगता है। दीपावली की रात को गादिया मार्केट में आग लगने की घटना इसका उदाहरण है। फिर भी अभी तक जिम्मेदारों ने भीतरी बाजार को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए कोई प्रभावी योजना नहीं बनाई। स्थाई अतिक्रमण की बात करें तो शहर में कई जमीन कारोबारी अभी भी सक्रिय है जो फर्जी दस्तावेज बनाकर भूखण्डों पर कब्जा करन उन्हें आगे से आगे बेचने के गोरखधंधे में जुटे है।
बजरी खनन : मिलीभगत से खोखली कर रहे नदी
16 नव बर 2017 से बजरी खनन पर रोक है। अवैध खनन को रोकने की जिम्मेदारी पुलिस व खनन विभाग के अधिकारियों के कंधों पर है। लेकिन स्थिति यह है कि महज खानापूर्ति की जा रही है। अब तो दिन के उजाले में लाम्बिया, रोहट, सोनाईमांझी, शिवपुरा, सोजत रोड सहित जिलेभर में बजरी का अवैध खनन हो रहा है। लेकिन, जिम्मेदार आंखे मूंदे हुए है। जिसका नुकसान आमजन को उठाना पड़ रहा है। आलम ये है कि जरूरतमंद लोगों को मकान बनाने के लिए बढ़े हुए दामों से बजरी खरीदनी पड़ रही है। जिसके चलते जिले के हजारों लोगों का आशियाना बनाने का खर्चा बढ़ा है।
सडक़ें : गड्ढ़ों से जूझने को मजबूर वाहन चालक
शहर की मंडिया रोड हो या रामदेव रोड की सडक़। हालत यह है कि इन मार्गों से गुजरने पर वाहन चालकों की कमर दर्द होनी लगती है। शहर के कई गली मोहल्लों में भी कुछ ऐसी ही सडक़ें बनी हुई है। जिसके चलते आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है नहर पुलिया मार्ग हादसों का मार्ग बना हुआ है लेकिन उसे भी चौड़ा कर डिवाइडर बनाने का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। जबकि, इसे लेकर कई बार जनता अपनी आवाज मुखर कर चुकी है। लेकिन, सुनवाई होती ही नहीं है।
पुलिस : नशे के कारोबार पर नहीं लगा पाई लगाम
रात आठ बजे बाद शराब बिक्री पर पाबंदी है लेकिन चुनावी समय होने के बाद भी पाली विधानसभा क्षेत्र में कई गली-मोहल्लों में शराब रात्रि में बिक रही है। यह स्थिति पिछले कई सालों से है जिस पर लगाम लगाने में पुलिस कामयाब नहीं हो सकी है। शहर के इन्दिरा कॉलोनी, शहीद भगतसिंह कॉलोनी, नया गांव, दुर्गा कॉलोनी सहित औद्योगिक थाना क्षेत्र के कई मोहल्लें इसके उदाहरण है। नशे के आदि ज्यादातर युवा हो रहे है, जो गांजा, डोडा-पोस्त, स्मैक का नशा करते है। इनकी बिक्री पर पाबंदी न लग पाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
शहर की यह भी है प्रमुख समस्याएं
- प्रदूषण की समस्या पर अब राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसका स्थायी समाधान हो।
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उच्च स्तरीय कोचिंग संस्थान शहर में खुलने चाहिए।
- सिटीजन चार्टर पर सख्ती से अमल किया जाना चाहिए। सरकारी दफ्तरों में मामूली काम के लिए भी चक्कर काटने पड़ते हैं।
- बांगड़ अस्पताल रेफरल अस्पताल बन गया है। व्यवस्था ठीक करने की आवश्यकता है।
- बांगड़ कॉलेज को यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जाना चाहिए। पाली, जालोर व सिरोही जिलों को इस यूनिवर्सिटी से जोड़ा जा सकता है।
- पाली में चाइल्ड लेबर की समस्या यथावत है। इसका समाधान किया जाना चाहिए।
- पाली से जयपुर व दिल्ली के लिए सीधी टे्रनें नहीं है। टे्रन की सुविधा होनी चाहिए।
- शहर में बिजली के तार झूल रहे हैं। झूलते तारों को ठीक किया जाना चाहिए ताकि करंट जैसे हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।
- पाली टेक्सटाइल उद्योगों पर निर्भर है। यहां अन्य उद्योग भी विकसित किए जाने चाहिए।
- शहर सहित जिले में कई थाना क्षेत्रों में स्मैक, डोडा-पोस्त, गांजे के नशे का आदि युवाओं को बनाया जा रहा है। जिससे अपराध बढ़ते है।





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