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आइटीआइ कॉलेज, उमावि होने के बावजूद बालिका छात्रावास नहीं

 


पाटोदी. पंचायत समिति पाटोदी मुख्यालय पर बालिका छात्रावास का अभाव क्षेत्र की बालिकाओं के लिए अभिशाप बना हुआ है। कई ग्राम पंचातयों में माध्यमिक स्तर के विद्यालय होने से उच्च शिक्षा के लिए बालिकाएं पाटोदी के विद्यालय में प्रवेश लेती हैं। यहां छात्रावास नहीं होने से गांव से पाटोदी तक अप-डाउन करना होता है। अकेली बालिका को पढऩे के लिए घर से दूर भेजने के झंझट से बचने के लिए कई अभिभावक उन्हें पढ़ाई ही छुड़वा रहे हैं। वहीं, कई बालिकाएं अकेली कमरा किराया पर लेकर पढ़ाई कर रही हैं।

प्रदेश सरकार ने पाटोदी व क्षेत्र के गांवों की बड़ी आबादी को देखतें हुए यहां पंचायत समिति, उप तहसील, आइटीआइ कॉलेज स्वीकृत किया, लेकिन अभी तक बालिका छात्रावास नहीं खोला है। लम्बे समय से छात्रावास खोलने की मांग के बावजूद सरकार ने अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं दी है। एेसे में ग्रामीण बालिकाएं पढ़ाई छोडने या घर से अप-डाउएन करने को मजबूर है।
लंबी दूरी व साधनों की कमी आ रही आड़े- पाटोदी से कई गांव की दूरी 30 से 40 किलोमीटर है। वहां से आवागमन के साधन कम है। ऐसे में सुबह से आने में जल्दबाजी होती हैं, तो शाम तक देर तक पहुंच पाती है। ऐसे में परिजन उनको सरकारी विद्यालय में पढऩे की जगह स्वयंपाठी के रूप में ही पढऩा उचित समझते है। अधिकांश बालिकाओं को माध्यमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के बाद बालिकाओं को घर के कामों में लगा देते हैं। ऐसे में बालिकाओं को पढ़ाई छोडऩे को मजबूर होना पड़ रहा है।

सरकार बालिका छात्रावास खोलें - गांव से पाटोदी की दूरी अधिक होने के साथ आवागमन के साधन कम है, इस पर अभिभावक बेटियों को आगे की पढ़ाई नहीं करवा पाते हैं। सरकार बालिका छात्रावास खोलें। - मानाराम चान्दोरा, सरपंच सांगरानाडी
छात्रावास की जरूरत- पाटोदी में बालिका छात्रावास जरूरी है, इसके अभाव में हर वर्ग की छात्राएं आगे पढाई नहीं कर पाती हैं। ंसरकार शीघ्र छात्रावास स्वीकृत करें। - सूर्यकान्ता जाट, सरपंच साजियाली रूपजी राजाबेरी

 



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