जयपुर। शहर के सरस पार्लरों को निजी हाथोंं में देने का मामला अटकता नजर आ रहा है। राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फैडरेशन यानि आरसीडीएफ की ओर से शहर के दो सरस पार्लरों को निजी हाथों में देने के लिए जारी किया गया टेंडर तकनीकी वजहों से उलझ गया है।
नियम अनुसार आरसीडीएफ सरस पार्लरों को निजी हाथों में देने के लिए टेंडर जारी नहीं कर सकता। इसकी वजह है सचिवालय और हाईकोर्ट में स्थित सरस पार्लरों का अनुबंध सीधा जयपुर डेयरी से है। डेयरी ही इनकी देखरेख करता है। विधायकों को सस्ती चाय का मामला उठने के बाद जयपुर डेयरी ने आरसीडीएफ के साथ पार्लर संचालन के लिए अनुबंध किया है न कि निजी हाथों में देने के लिए।
दूसरी वजह यह भी है कि सचिवालय के सरस पार्लर को जयपुर डेयरी से अनुबंध सितंबर महीने में ही खत्म हो चुका है। वहीं तीसरी वजह यह भी है कि पार्लरों पर जयपुर डेयरी की मशीनरी लगी हुई है। ऐसे में इन मशीनों को आरसीडीएफ किसी को अनुबंध पर नहीं दे सकता है। आरसीडीएफ के सरस पार्लरों को निजी हाथों में देने से ना सिर्फ सरस की क्वालिटी में फर्क पड़ सकता है। साथ ही डेयरी को हर महीने दस लाख रुपए का नुकसान भी हो सकता है।





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