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सांवलियाजी की तर्ज पर बन रहा शौली मंदिर, अब दूर से भी दिखने लगा शौली गांव में

105 फीट ऊंचाई का बन रहा मंदिर
चूपना/मोवाई अरनोद उपखंड के मोवाई ग्राम पंचायत स्थित शिवना-रोजड़ नदी के संगम तट पर शौली हनुमान मंदिर का निर्माण सांवलियाजी मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। यहां मंदिर का निर्माण कार्य गत दस वर्ष से चल रहा है।इस मंदिर का गुम्बज तक कार्य हो गया है। इसके साथ ही इसमें छोटे-छोटे मंदिरों का कार्य भी चल रहा है।दूसरी मंजिल पर छोटे मंदिरों के लिए आकर्षक नक्काशी का कार्यचल रहा है।
कोटड़ी के निकट शौली हनुमान मंदिर का नव निर्माण कार्य वर्ष2008 से शुरू किया गया। अब तक इस मंदिर का काफी कार्य पूर्ण हो चुका है। इसकी ऊंचाई पर गुम्बज का कार्य भी हाके चुका है। इसकी ऊंचाई 105 फीट है। ऐसे में मंदिर अब दूर से दिखाई देने लगा है। मंदिर परिसर में पुजारी जगन्नाथ की समाधि, गीता मंदिर का भी नवनिर्माण किया जाएगा। बताया गया कि अब तक यहां करीब 11 करोड़ रुपए खर्चहो चुके है।
यह निर्माण पांचवी बार
शौली मंदिर का निर्माण सन् 1901 हुआ था। इसके बाद मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 2015 तक तीन बार और हो चुका है। वहीं मन्दिर पांचवीं बार नए आकार में बनाया जा रहा है।पुजारियों के अनुसार यहां हनुमानजी की प्रतिमा को तत्कालीन पुजारी जगन्नाथ ने एक ओटले पर पूजा-अर्चना शुरू की थी। इसके बाद यहां ओटले से लेकर चार बार मंदिर का नवनिर्माण हुआ।अब 115 वर्षबाद पांचवीं बार मन्दिर का निर्माण कार्य चल रहा है।
यह बनाया गया जा रहा मंदिर
शौली हनुमानजी के मन्दिर की ऊंचाई 105 फीट है। इसकी कुल लम्बाई 180 फीट और चौड़ाई 52 फीट रखी जा रही है। यहां शौली मंदिर की समिति बनी हुई है। इसके बाद सन् 2009 में देवस्थान विभाग से इसका पंजीयन कराया गया। जो श्री होरी हनुमान मंदिर न्यास के नाम से हुआ।
छोटे मंदिरों में भी स्थापित की जाएंगी प्रतिमाएं
शौली मंदिर की दूसरी मंजिल पर राम दरबार समेत कई छोटे मंदिरों का निर्माण कार्यजारी है। इनमें विभिन्न देवी-देवताओं की 16 छोटी प्रतिमाएं स्थापित की जाएगी। मंदिर के निज मन्दिर शिखर व सभा मंडप कार्य पूरा हो चुका है। जिसमें मकाराना का मार्बल, धौलपुर, बन्शी पहाड़पुर के पत्थरों पर नक्काशी की गई है।
नई बन रही भोजनशाला
यहां मंदिर न्यास की ओर से भोजनशाला नई बनाई जा रही है। न्यास के अध्यक्ष रूघनाथ आंजना और सचिव चिमनलाल गर्ग, कोषाध्यक्ष बालूराम आंजना ने बताया कि तीन सौ गुणा दो सौ फीट के आकार की भोजनशाला का निर्माण कार्य प्रगति पर है। वहीं यात्रियों के ठहरने के लिए दो धर्मशालाएं भी बनी हुई है।



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