अलवर. रामगढ़ विधानसभा सीट का चुनाव स्थगित होने से सारे गणित ही बदल गए हैं। यहां प्रमुख पार्टियों के नेता व कार्यकर्ता भी दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में शिफ्ट हो गए हैं। जब तक रामगढ़ में चुनाव की आगामी तारीख घोषित नहीं हो जाती तब तक यहां की चुनावी चर्चाएं भी थम सी जाएंगी। अब यहां सबसे अधिक यही चर्चा है कि 11 तारीख को चुनाव परिणाम में किसी पार्टी को सबसे अधिक सीट मिलेगी। जिसकी सरकारी बनेगी। उसका आगे चुनाव प्रचार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बसपा प्रत्याशी की मौत होने के बाद चुनाव स्थगित हो गया। जिसके कारण भाजपा व कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशियों के अलावा अन्य सभी प्रत्याशियों के चुनाव कार्यालयों में भी सूनापन छा गया। हर गली मोहल्ले में चुनाव प्रचार के वाहनों का शोर रुक गया। गांव-ढाणियों में प्रत्याशी व नेताओं के साथ पहुंचने वाला गाडिय़ों का काफिला थम गया। सभी दलों के प्रत्याशी भी अब चुनाव आयोग की ओर से घोषित की जाने वाली आगामी तिथि तक रुक गए हैं। आगे का प्रचार तभी जोर पकड़ेगा जब चुनाव की तारीख घोषित हो जाएगी।
लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब तो 11 तारीख के चुनाव परिणामों के बाद ही रामगढ़ में चुनावी चर्चा फिर से जोर पकड़ेगी। पहले तो सबकी नजर यहीं रहेगी कि प्रदेश में सरकार किसकी बनती है। उसके बाद रामगढ़ में एक तरह से चुनाव के नए समीकरण में खड़े हो सकते हैं। अब तक की भागदौड़ कितनी काम आएगी यह भी आगे की ििपरस्थतियां ही बताएंगी।
बाद में प्रचार का पूरा मौका
बाद में प्रचारप्रदेश की 199 सीटों के चुनाव होने के बाद अकेली रामगढ़ विधानसभा सीट पर बाद में चुनाव होगा। जिसके कारण पार्टी के नेताओं को भी खूब मौका मिलेगा। छोटे से बड़े नेताओं को बुलाने में आसानी हो जाएगी।
दूसरे विधानसभा चुनावों में लग गए कार्यकर्ता
रामगढ़ से प्रमुख पार्टियों के नेता व कार्यकर्ता अब दूसरे विधानसभा चुनावों में लग गए हैं। सभी पार्टियों अपनी अपनी सहूलियत से कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां दे रहे हैं। आमजन भी इस असमंजस में पड़ गया कि देखते हैं आगे होता है क्या।





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