कांग्रेस ने 5 राज्यों में चुनावों से पहले हर राज्य में किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। 5 से 3 राज्यों में कांग्रेस ने चुनाव जीता और दो राज्यों (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़)में तो सरकार बनते ही आदेश जारी भी कर दिए लेकिन राजस्थान में इंतजार अब लम्बा होता जा रहा है। इसके कई कारण है। पहला प्रदेश में कर्जदार किसानों की संख्या ज्यादा है, दूसरा कर्ज की जो राशि इतनी अधिक है कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को करारा झटका लग सकता है। यही वजह है कि नवनिर्वाचित सरकार बिना किसी अध्ययन के कोई भी घोषणा करने से बच रही है। माना जा रहा है कि निजी और स्टेट सेक्टर के बैंकों का भी करीब 80 हजार करोड़ रुपये का कर्ज किसानों पर बकाया चल रहा है। ऐसे में इतनी बड़ी रकम जुटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
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सभी वादे पूरे होंगे
उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इस मामले में कहा है कि किसानों की कर्जमाफी के लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। जल्द ही सरकार इस पर निर्णय लेगी। पायलट ने कहा कि घोषणा-पत्र में शामिल किसानों की कर्जमाफी से लेकर बेरोजगारी भत्ता सहित सभी जन कल्याण के कार्यों व नीतियों को जल्द लागू किया जाएगा। वहीं मंत्रिमंडल का फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से चर्चा के बाद किया जाएगा।
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नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने उठाए सवाल
कर्ज माफी पर हाल ही में राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी पर की गई टिप्पणी पर नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने अरविंद पनगढिय़ा ने सवाल उठाए है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि हम 70 वर्षो में किसानों की समस्या नहीं सुलझा पाए। कर्ज माफी हल नही हो सकती। हमें दूसरे रास्ते खोजने होंगे।





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