जैसलमेर. शहर के मुख्य मार्गों पर गलियों में लगे जर्जर व क्षतिग्रस्त विद्युत पोलों से हर समय हादसे का खतरा बना हुआ है। शहर के नगरपरिषद रोड, एयरफोर्स चौराहा, गीता आश्रम चौराहा, यूनियन चौराहा, ट्रांसपोर्ट नगर चौराहा सहित अन्य मुख्य मार्गों पर क्षतिग्रस्त व जर्जर हाल में हादसे को निमंत्रण देते विद्युत पोल देखे जा सकते हैं, लेकिन बावजूद इसके नगरपरिषद व संबंधित विभाग की कुंभकर्णी निन्द्रा नहीं टूट रही है। गौरतलब है कि शहरी क्षेत्र में लगे अधिकांश विद्युत पोल करीब 10 से 15 वर्ष पूर्व लगाए गए हैं, जो अब जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रहे है। कई विद्युत पोल लोहे की पट्टियां व तारों के सपोर्ट से खड़े है। शहर के भीतरी हिस्सों में भी विद्युत पोल दुर्दशा का शिकार हो रहे है।
कई बार हो चुके हैं हादसे
शहर में जर्जर व क्षतिग्रस्त हो रहे विद्युत पोलों के कारण पूर्व में भी कई बार हादसे हो चुके है और कई बार विद्युत तारों के टूटने की भी घटनाएं हो चुकी है। क्षतिग्रस्त विद्युत तारों को बदलने व उन्हें दुरुस्त करने के लिए संबंधित विभाग की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
हर समय बना रहता है भय
नगरपरिषद के समीप गत कई दिनों से एक विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हालत में है, इससे जुड़ी विद्युत तारें भी नीचे झूल रही है। ऐसे में हर समय बड़ा हादसा होने का भय बना हुआ है। तेज आंधी व हवा होने के कारण भी विद्युत तारें शिथिल हो गई है। शहर के गोपा चौक, पटवा हवेली क्षेत्र, हनुमा चौराहा, ढिब्बा पाड़ा, मलका प्रोल सहित भीतरी भागों में जर्जर व क्षतिग्रस्त विद्युत पोल हादसे का सबब बने हुए है। यहंा तारों के जाल से हर समय हादसे की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोडवेज बसों का अभाव
पोकरण. क्षेत्र के कई गांवों में अभी तक राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की रोडवेज सेवाओं का अभाव होने के कारण ग्रामीणों को निजी बसों में अधिक यात्री भाड़ा देकर यात्रा करनी पड़ रही है। जैसलमेर जिला मुख्यालय पर रोडवेज आगार शुरू हो जाने के आठ वर्ष बाद भी क्षेत्र के अधिकांश गांवों को रोडवेज सेवाओं का इंतजार है। क्षेत्र के फलसूण्ड, राजमथाई, सांकड़ा, भैंसड़ा सहित ऐसे कई बड़े मार्ग है, जहां प्रतिदिन 50 से अधिक निजी बसें संचालित हो रही है। इन मार्गों पर रोडवेज सेवाएं नहीं होने के कारण निजी बस संचालकों की ओर से न केवल उन्हें ऊपर नीचे भरकर यात्रा करवाई जा रही है, बल्कि उनसे मनमाना यात्री भाड़ा भी वसूल किया जा रहा है। जिससेे ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर व अधिक भाड़ा देकर भी मजबूरन यात्रा करनी पड़ रही है। ऐसे में उन्हें परेशानी हो रही है।





No comments:
Post a Comment