समदड़ी ञ्च पत्रिका. कम नामांकन के चलते बंद किए गए सरकारी विद्यालयों के भवन रखरखाव के अभाव में खण्डहर बनने लगे हैं। बावजूद इसके शिक्षा विभाग और प्रशासन ध्यान नहीं दे रहें, जिसके चलते बंद विद्यालयों के आसपास के लोगों को परेशनी सहनी पड़ रही है। खण्डर भवनों के आसपास बच्चे खेलने से हर वक्त अनहोनी का डर रहता है तो सूनसान जगह देख समाजकंटकों ने भी यहां डेरा डाल दिया है। समदड़ी-सिवाना सड़क पर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुईली करीब पांच वर्ष पूर्व कम नामांकन पर बंद किया गया था। इसके बाद इसकी कोई सार संभाल नहीं की गई। इस पर विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। वहीं सूनसान भवन के चलते शराबी और नशेड़ी यहां जमघट लगा कर बैठे रहते हैं। इसके चलते आसपास रहने वाले लोगों का चैन खो गया है।
समदड़ी में भी विद्यालय हो चुके बन्द - राज्य सरकार ने कम नामांकन वाले विद्यालयों को बन्द कर पास के विद्यालयों में मर्ज किया। वर्ष 2016 व 17 में कई विद्यालयों को बंद किया। समदड़ी कस्बे में राजकीय प्राथमिक विद्यालय कांकराला रोड़, राजकीय प्राथमिक विद्यालय राईकों का गोलिया, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बालिका, राजकीय प्राथमिक विद्यालय पांचानिया बेरा आदि विद्यालय दो वर्ष पूर्व बंद किए थे। बन्द होने के बाद भवनों की हालात लावारिश बनी हुई है ।
बंद विद्यालय आरम्भ करें- कम नामांकन के चलते बन्द किए गए सरकारी विद्यालयों को वापस खोलना चाहिए, ताकि आस पास में रहने वाले लोगों को इसका समुचित लाभ मिल सके। - बाबूलाल
विद्यालय शुरू करवाने की जरूरत- सुईली गांव के विद्यालय को पुन: चालू करने के लिए कई बार पंचायत स्तर पर प्रयास किए गए। यह विद्यालय अगर पुन: चालू किया जाए तो आस पास के बच्चों को इसका लाभ मिलेगा।- उम्मेदराम चौधरी, सरपंच बामसीन
बंद विद्यालय आरम्भ करें- कम नामांकन के चलते बन्द किए गए सरकारी विद्यालयों को वापस खोलना चाहिए, ताकि आस पास में रहने वाले लोगों को इसका समुचित लाभ मिल सके। - बाबूलाल परिहार, पूर्व सरपंच समदड़ी





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