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मारपीट से घायल कर फैला देते दहशत, फिर आराम से लूट की वारदात को देते थे अंजाम

राजसमंद. 20 से 25 वर्ष की उम्र के शातिर बदमाश भले ही पढ़े लिखे नहीं है, मगर पुलिस के तकनीक ज्ञान से पूर्णतया वाकिफ है। तभी तो वारदात के वक्त फोरलेन से कभी आवाजाही नहीं की और सीसीटीवी कैमरे से हमेशा दूरी बनाए रखी। वारदात के वक्त मोबाइल का उपयोग भी वर्जित ही रखते। वारदात से पहले बेरहम पिटाई कर घायल करने, बंधक बना कर मौत की दहशत फैला देते और फिर आराम से खाने-पीने के साथ संगीन वारदात को अंजाम देते थे। इसी सतर्कता के चलते अन्तर्राज्यीय गिरोह का कोई सदस्य पुलिस की पकड़ में नहीं आया। चोरी, लूट, डकैती की हर वारदात शातिर गैंग ने बैखोफ होकर अंजाम दी और लाखों रुपए का माल पार करते रहे। हर वारदात के बाद गिरोह के सभी सदस्य अपने अपने घर चले जाते और दैनिक काम में जुट जाते। इससे एकाएक किसी को शक भी नहीं हुआ और एक के बाद एक संगीन वारदात को अंजाम देते रहे।

तीनों वारदातों का एक जैसा तरीका
चित्तौडग़ढ़ जिले के राशमी में 26 नवम्बर 2018 को बालू दरोगा की हत्या व उदयपुर जिले के मावली में लगातार दो जगह लूट की वारदातें करने के बावजूद पुलिस की पकड़ में नहीं आए। शातिर गैंग के हर सदस्य का अलग अलग काम तय है, जो वारदात के वक्त निगरानी, मारपीट, बंधक बनाने, लूट का माल संग्रहित करने का कार्य बांट रखा था। हालांकि राशमी, मावली में हुई डकैती व लूट की वारदातों का तरीका भी ठीक चारभुजा के मोराणा गांव में हुई डकैती समान ही रहा।

आटा, घी, मुर्गा की चोरी बना आधार
मोराणा में डकैती की वारदात में आटा, घी व मुर्गा चुराकर ले जाना भी पुलिस के लिए मुख्य आधार बना। प्रथम आटा, घी, मुर्गा चोरी से यह तो स्पष्ट हो गया कि वारदात को अंजाम देने वाले बदमाश हाईप्रोफाइल के नहीं है। इस पर आदिवासी व मजदूर वर्ग के बदमाशों की ही तहकीकात शुरू कर दी। मोराणा की वारदात के तरीके भी मावली व राशमी की वारदातों से मिलता जुलते मिले। इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि बदमाश उदयपुर संभाग के ही है। इसी आधार पर राजसमंद पुलिस ने उदयपुर, चित्तौडग़ढ़ पुलिस की टीमों से पूछताछ की, जिससे एक बदमाश बागरिया युवक के बारे में पता चला। पुलिस ने रात को उसी के घर दबिश दी, मगर वह घर नहीं मिला। हालांकि उसके घर यह तो पता चल गया कि उसके साथी कौन कौन है, जिससे पुलिस बारी बारी से दबिश देते हुए चार बदमाशों को दबोच लिया, जबकि तीन आरोपी सूचना मिलते ही फरार हो गए।

उदयपुर से कार चुरा राशमी में डकैती
शातिर गैंग ने उदयपुर के प्रतापनगर थाना क्षेत्र से एक कार चुराकर चित्तौडग़ढ़ जिले के राशमी पहुंचे, जहां डकैती के साथ बालू दरोगा की हत्या कर दी। वारदात के बाद बदमाशों ने चोरी की कार भादसोड़ा में सूनसान जगह पर छोड़ दिया। इसी तरह चारभुजा के मोराणा में डकैती की वारदात को अंजाम देने के लिए उदयपुर के सविना से बाइक चुराई, जिसे मोराणा में घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर छोड़ कर फरार हो गए।

ग्रामीण क्षेत्र के रास्तों से पहुंचे घर
चारभुजा मोराणा में 13 दिसम्बर को डकैती की वारदात को अंजाम देने के बाद शातिर बदमाश रिछेड़ होकर ग्रामीण क्षेत्र के रास्तों से ही कडिय़ा, लोसिंग क्षेत्र के तंग रास्तों से होकर मावली की तरफ फरार हो गए। वारदात के दूसरे दिन पुलिस ने फोरलेन के सभी टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, मगर कहीं भी फुटेज नहीं मिला, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र से कैम्पर लेकर जाने के पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लग गए। उसी आधार पर कच्ची चित्तौड़ के भादसोड़ा व उदयपुर के खेमली तक पहुंच गए और बदमाश प्रवृत्ति के युवकों को दबोच लिया।

यह पुलिस दल जुटा जांच में
एएसपी डॉ. राजेश भारद्वाज, डीएसपी मनजीतसिंह, मावली थाना प्रभारी घनश्यामसिंह देवड़ा, सीआई राजेन्द्र गोदारा, चारभुजा थाना प्रभारी भंवरलाल विश्नोई, आमेट थाना प्रभारी पेशावर खां, केलवा थाना प्रभारी दीपक कुमार, खमनोर थाना प्रभारी महेश मीणा, दिवेर थाना प्रभारी दिलीपसिंह, साइबर सेल के हैड कांस्टेबल पवनसिंह, औंकार सिंह, भूरे खां, मोहम्मद सलीम, आनंद कुमार, शिवदर्शन सिंह, विरेन्द्रसिंह भाटी, भगवानाराम, सुरेन्द्र, बलदेव, ओमसिंह, भोपालसिंह, किशन, बालमुकुंदसिंह, राजेश, रामकरण, उदयपुर के एएसआई सुरेश कुमार मीणा, एफएसएल मोबाइल युनिट प्रभारी अभयप्रतापसिंह।

आईजी ने भी की पूछताछ
आईजी विशाल बंसल ने केलवा थाने पहुंचकर मोराणा डकैती में गिरफ्तार शातिर चार बदमाशों से पूछताछ की। साथ ही पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए अग्रिम कार्रवाई के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस दौरान एसपी भुवन भूषण यादव भी साथ रहे। बाद में जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी पुलिस अधिकारियों की विशेष बैठक लेकर वारदात में फरार दो बदमाशों की त्वरित गिरफ्तारी के लिए भी खास प्रयास के लिए निर्देश दिए। साथ ही डकैती की वारदात के पांचवें दिन राजफाश करने पर पूरी पुलिस टीम की प्रशंसा करते हुए वांछित को जल्द गिरफ्तार करने के खास निर्देश दिए।

वारदात के अभ्यस्त है बदमाश
आईजी विशाल ने बताया कि डकैत गैंग के सदस्य निर्दयी और बदमाश प्रवृत्ति के है, जिन्हें कोई भी जघन्य अपराध करने में हिचक नहीं दिखी। प्रारंभिक पूछताछ में बदमाशों ने सात वारदातें कबूली है और गुजरात के सूरत, डूंगरपुर, बांसवाड़ा क्षेत्र में इनकी चहलकदमी रही है, जिससे उस इलाके में भी कई वारदातें खुलने की उम्मीद है। गुजरात, मुंबई तक आवाजाही रही है, जिससे निश्चित तौर पर कई वारदातें की होगी, जिसके बारे में रिमांड पर लेकर पुलिस द्वारा पूछताछ की जाएगी।

हर जगह मारपीट कर किया प्रताडि़त
आईजी विशाल ने बताया कि डकैत गैंग के सदस्यों के वारदातों के तरीके अलग अलग है और कुछ वारदातों में तरीके एक जैसे दिखे हैं। हालांकि हर वारदात में प्रार्थी व लोगों को मारपीट कर घायल किया व प्रताडि़त किया है।

पुराना रिकॉर्ड नहीं मिला
शातिर गैंग के सदस्यों के बारे में अब तक उदयपुर संभाग या प्रदेश के अन्य थानों में भी कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। मोस्ट वाटेंड होने के बारे में भी प्रथम दृष्टया पता नहीं चला है, मगर अब इनकी प्रोफाइल सभी पुलिस थानों को भेजकर वस्तुस्थिति का पता किया जाएगा।

डकैत गैंग में दस से बारह सदस्य
आईजी विशाल ने बताया कि डकैत गैंग में चार आरोपी पुलिस गिरफ्त में है, जबकि छह से सात आरोपी और भी है। क्योंकि हर वारदात में सभी सदस्य एक साथ नहीं रहते। किसी वारदात में दो सदस्य नहीं है, तो किसी में चार नदारद रहे। चारभुजा के मोराणा की वारदात के वक्त छह आरोपी थे। गिरोह में शामिल सदस्य ज्यादातर आपस में परिचित व रिश्तेदार ही है।

गुब्बारे- झाडू बेचने के बहाने रैकी
डकैत गैंग के सदस्य अक्सर गुब्बारे व झाडू बेचने का काम करते हैं। विभिन्न शहरों व गांवों में गुब्बारे, झाडू बेचने के बहाने रैकी कर लेते हैं और फिर वारदात को अंजाम देने के लिए सभी बदमाश एक साथ मिल जाते हैं।



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