बाड़मेर. शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए यहां के चौराहों को विकास की दरकार है। चौराहों की देखरेख के लिए अलग से कार्मिकों की नियुक्ति,चौराहों को आकर्षक बनाने के लिए गुजरात पैटर्न पर विकास और इनका आम आदमी से जुड़ाव बनाए रखने के लिए स्वच्छता पर ध्यान देने की जरूरत है।
अम्बेडकर सर्कल
सर्कल के चारों ओर से टूटी रैलिंग व सूखी घास सौन्दर्य को प्रभावित कर रही है। यहां रंग- रोगन का भी अभाव है। सर्कल के भीतर कचरा बिखरा हुआ है। अनदेखी का शिकार है।
महावीर सर्कल
यहां टूटी रैलिंग के चारों तरफ स्थानीय दुकानदारों व लोगों ने लोहे की जाली लगाई है। जिससे पशु अंदर की तरफ नहीं आए। इसके सौन्दर्य को लेकर किसी प्रकार के प्रयास नहीं किए गए हैं।
पांच बत्ती सर्कल
सर्कल के चारों ओर रंग- रोगन नहीं होने के साथ यहां लोगों ने चौराहे पर लिखकर बदहाल कर दिया है। यहां रैलिंग नहीं है। सौंदर्यीकरण की यहां ज्यादा दरकार है।
विवेकानंद सर्कल
सर्कल के अंदर लगे गमले ही गायब हो गए हंै। रैलिंग के पत्थर बिखर गए हंै। घास व सौन्दर्य को लेकर किसी प्रकार का काम यहां नहीं दिखता है।
मल्लीनाथ सर्कल
सर्कल के चारों ओर सुरक्षा नहीं होने के कारण बेआसरा पशु इसमें घूमते रहते हैं। ऐसे में सर्कल के अंदर लगी दूब को नुकसान हो रहा है। यहां नियमित देखरेख की जरूरत है।
न्यू अम्बेडकर सर्कल
सर्कल के अंदर घास सूख चुकी है। चौराहे की रैलिंग टूटी है। यहां रंग- रोगन का अभाव है। पौधे सूखे हुए हैं। नियमित देखरेख के अभाव में यह अपनी आभा खो रहा है।
इंदिरा सर्कल
सर्कल के अंदर लगी दूब को महीनों से पानी नहीं मिला। एेसे में पूरा मैदान ही खाली हो गया है। यहां किसी प्रकार की सार संभाल नहीं है। अनदेखी का दंश यहां साफ दिखता है।





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