झालावाड़/बकानी. कोटा भोपाल मेगा हाईवे 89 पर बने मण्डावर से लेकर मध्यप्रदेश की सीमा तक सीसी रोड़ पर हादसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। बीती शनिवार की रात्रि 8 बजे झालावाड़ रोड पर स्थित झिरी के खाल की पुलिया के पास पर बाईक और एक पिकअप की आमने सामने की भिड़न्त हो गई, जिसमें बाइक सवार तूफान सिंह गुर्जर की मौत हो गई और अनार सिंह गम्भीर रूप से घायल हो गया। घायल का झालावाड़ अस्पताल में ईलाज जारी है। खास बात ये है कि घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई है।
मृतक के चचेरे भाई ने भगवान सिंह पुत्र देवलाल गुर्जर निवासी कंकरिया ने मामला दर्ज करवाया है कि उसका भाई तूफानसिंह व अनार सिंह अपने खेत में गेहूं की फसल की सिंचाई कर रहे थे। खाद की कमी होने के कारण दोनों बकानी खाद लेने के लिए आए हुए थे। तभी रात्रि को 8.30 बजे सूचना मिली कि दोनों का एक्सीडेन्ट हो गया है। सूचना पर बकानी अस्पताल में आए तो पता चला कि तूफानसिंह की मौत हो गई व अनार सिंह का पैर टूट गया, जिसको 108 एम्बुलेन्स की मदद से झालावाड़ रैफर किया गया। वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर पिकअप बोलेरो गाड़ी की तलाश शुरू कर दी। थाना प्रभारी उमेश मेनारिया ने मय जाप्ते के मौके पर पहुंच कर घटना स्थल का जायजा लिया।
सीसी टीवी में कैद हुआ हादसा
हादसा झिरी के नाले पर हुआ, जहां पास ही वाहनों के शोरूम के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगा था। घटना इस कैमरे में कैद हो गई। इसमें साफ दिखाई दे रहा है कि पिकअप वाहन ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए बाइक को टक्कर मार दी और हादसे के बाद वाहन लेकर फरार भी हो गया।
एक साल में दूसरा हादसा
झिरी के खाल की पुलिया पर यह दूसरा दर्दनाक हादसा है। इससे पहले एक दिसम्बर 2017 की सुबह बकानी निवासी पुलिस कांस्टेबल सुरेश शर्मा ड्यूटी करने के लिए बाइक से झालावाड़ जा रहा था। उसे भी इसी पुलिया पर एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिससे कांस्टेबल की भी घटना स्थल पर ही मौत हो गई थी। तब भी पूरा घटना क्रम इसी सीसी टीवी कैमरे में कैद हुआ था। इस घटना को एक साल ही बिता था की रविवार की रात्रि को यह दुसरा दर्दनाक घटना हो गई।
खाद की कमी ने ली किसान की जान
बकानी क्षेत्र में इन दिनों यूरिया खाद की बड़ी किल्लत हो रही है। किसान खाद लेने के लिए इधर उधर भटक रहा है। मृतक तूफान सिंह व उसका साथी अनार सिंह भी गांव के खाद लेने के लिए बकानी आए हुए थे, लेकिन बकानी में खाद नहीं मिलने के कारण दोनो जगपुरा गांव जाकर वहां से आधा कट्टा खाद लेकर अपने गांव कंकरिया जा रहे थे। रास्ते में ही वह हादसे का शिकार हो गए। यदि उनको बकानी कस्बे में ही खाद उपलब्ध हो जाता, तो उन्हें 8 किलो मीटर दूर जगपुरा गांव में खाद लेने के लिए नहीं जाना पड़ता और ये हादसा टल सकता था।





No comments:
Post a Comment