भीलवाड़ा। चुनाव (Rajasthan Electoin 2018) जीतने के लिए प्रत्याशियों ने भले दिन-रात एक किए हों, लेकिन कुछ उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने सिर्फ अपना शौक पूरा करने के लिए ही चुनाव लड़ा। वह भी दिग्गजों के सामने। पत्रिका की दो ऐसे युवा प्रत्याशियों से चर्चा हुई, जो मुख्यमंत्री Vasundhara Raje व पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot के सामने चुनाव मैदान में थे। चुनाव लडऩे के लिए दोनों ही प्रत्याशी अपने जिलों को छोडकऱ वहां पहुंच गए। नामांकन दाखिल करने के बाद इन प्रत्याशियों ने न प्रचार, न खर्चा किया।
भीलवाड़ा जिले की सीमा के अंतिम गांव और राजसमंद की देवगढ़ तहसील के बूझड़ा निवासी करण शर्मा ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव लडऩे के लिए झालरापाटन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। शर्मा ने बताया कि उन्हें पता है कि वे जीत नहीं सकते हैं फिर भी चुनाव लडऩे का अलग अनुभव है। ई-मित्र का काम करने वाले करण ने बताया कि उन्होंने केवल सोशल मीडिया पर ही प्रचार किया। अब मतगणना पर फिर झालावाड़ जाएंगे।
हारना ही है तो दिग्गजों से हारेंगे
करण शर्मा ने बताया कि चुनाव हारना ही है तो दिग्गजों से हारेंगे। उन्होंने नामांकन के समय दस हजार रुपए जमा कराए। इसके बाद एक भी रुपया खर्च नहीं किया। नामांकन के लिए वे तीन दोस्त गए झालरापाटन गए और फार्म भरकर आ गए। करण ने बताया कि कांग्रेस पार्टी से जरूर नामांकन उठाने के लिए उनके पास फोन आया था। लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
पवन ने लड़ा गहलोत के सामने चुनाव
अलवर जिले के बहरोड़ तहसील के जखराना निवासी पवनकुमार मेहता ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सरदारपुरा से नामांकन दाखिल किया। पढ़ाई कर रहे पच्चीस वर्षीय पवन ने बताया कि उन्होंने कोई प्रचार नहीं किया, लेकिन चुनाव लड़ा। उन्होंने कोई खर्च भी नहीं किया। पवन ने बताया कि वे जोधपुर में पढ़ाई करते हैं। जोधपुर रहते हैं, इसलिए चुनाव लड़़ लिया।
मिलती हैं वीआइपी सुविधाएं
भीलवाड़ा जिले की सात विधानसभा सीटों पर 75 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। इनमें से कई उम्मीदवार ऐसे रहे कि नामांकन के बाद न तो रैली निकाली और न ही किसी मतदाता से मतदान करने की अपील की। भीलवाड़ा के एक निर्दलीय उम्मीदवार ने तो बताया कि चुनाव में सब जगह वीआइपी सुविधाएं मिलती हैं, इसलिए इस बार भी नामांकन भर दिया।





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