नई दिल्ली : 18 दिसंबर में जयपुर में हुई आइपीएल नीलामी में पचासों मालामाल हो गए। इनमें कई ऐसे नाम भी थे जा एकदम अनजान थे। इसके अलावा फ्रेंचाइची टीमों में पहले से भी 150 से ज्यादा खिलाड़ी टीम में हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन प्लेयर्स को सिर्फ उतनी ही रकम नहीं मिलती, जितनी नीलामी में तय होती है। कई खिलाड़ी इससे बहुत ज्यादा कमाते हैं तो कई बार ऐसा होता है कि नीलामी के बावजूद उनके हाथ एक पैसा भी नहीं आता। आइए जानते हैं कि आइपीएल में पैसे का वितरण कैसे होता है।
एक मैच नहीं खेलने पर भी मिलता है पूरा पैसा
अगर ऑक्शन में कोई फ्रेंचाइजी किसी टीम को खरीदती है तो वह चाहे एक भी मैच न खेले, लेकिन फ्रेंचाइची टीम उसे पूरे पैसे देती है, लेकिन अगर वह चोटिल होकर मैचों से दूर रहता है तब उसे पूरे पैसे नहीं मिलते। फ्रेंचाइजी टीम के 80 फीसदी मैचों तक उपलब्धता रहने पर भी फ्रेंचाइजी प्लेयर को पूरे पैसे देती है। लेकिन इससे ज्यादा चोटिल रहने या अन्य कारण से दूर रहने पर पैसे उसी अनुपात में कटते हैं। यानी अगर कोई प्लेयर एक मैच के लिए भी उपलब्ध नहीं रहता है तो उसे एक पैसे भी नहीं मिलेंगे। इसलिए आइपीएल के दौरान खिलाड़ी खुद को फिट नहीं रखते हैं तो वह पूरी रकम से हाथ धो सकते हैं।
ये हैं कमाई के अन्य तरीके
आइपीएल के दौरान फ्रेंचाइजी खिलाड़ियों को हर दिन लगभग 100 डॉलर का दैनिक भत्ता मिलता है। इसके अलावा होटल, खाना और आना-जाना भी टीम के खर्चे पर होता है। इसके अलावा टीम को मिलने वाले पुरस्कार का 50 फीसदी रकम भी खिलाड़ियों में बांट दी जाती है। उदाहरण के तौर पर विजेता टीम को 15 करोड़ रुपए की रकम बतौर पुरस्कार मिलती है। फ्रेंचाइजी इसमें से 7.5 करोड़ रुपए खिलाड़ियों में बांट देती है। इतना ही नहीं, प्लेयर्स के पास विज्ञापन के जरिये भी कमाने का अवसर होता है और कई प्लेयर्स तो विज्ञापनों के जरिये ही अपनी नीलामी में मिली अपनी रकम से कई गुना ज्यादा कमा लेते हैं।





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