जैसलमेर. जैसलमेर में पर्यटन व्यवसाय को परवान चढ़ाने में यहां के कलात्मक स्थलों तथा रेतीले धोरों के साथ सुरम्य वातावरण व लोगों के छलरहित व्यवहार का बड़ा योगदान रहा, लेकिन वर्तमान में ऐसा नहीं रह गया है। पर्यटन व्यवसाय में ऐसे लोग षामिल हो गए हैं जो जल्द से जल्द पैसा कमाने के चक्कर में सैलानियों के साथ छल-कपट तथा ठगी करने से भी बाज नहीं आते। देशी-विदेशी सैलानियों को स्वर्णनगरी की धरा पर पांव धरने से पहले ही ऐसे तत्वों से दो-चार होना पड़ रहा है। खेदजनक तथ्य तो यह है कि इस संबंध में जिम्मेदारों को सारी जानकारी होने के बावजूद वे प्रभावी कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति नहीं दर्शा पा रहे।
काबू में नहीं आ रहे लपके
जैसलमेर पर्यटन को सबसे ज्यादा नुकसान लपका तत्व पहुंचा रहे हैं। होटलों तथा रिसोट्र्स संचालकों की ओर से काम करने वाले ये युवा बाड़मेर और जैसलमेर मार्ग पर बाइक्स को लेकर तैनात रहते हैं। जैसे ही सैलानियों का वाहन वहां से गुजरता है, वे उसके पीछे लग जाते हैं। इन युवाओं का हौसला इतना बुलंद है कि वे 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से भी ज्यादा गति से बाइक चलाते हुए सैलानियों के वाहनों का पीछा करते हैं और उन्हें रुकवाकर दिशाभ्रमित करने का प्रयास करते हैं। ये लपके सैलानियों को अपने होटलों में ठहराने के लिए उन्हें मनगढ़ंत कहानियां सुनाकर अन्य होटलों ही नहीं बल्कि सोनार दुर्ग आदि जगहों के बारे में दुष्प्रचार करते हैं। लपकों की यह समस्या सम मार्गपर भी बीते अर्से से काफी बढ़ गई है। दामोदरा से लेकर कनोई के बीच लपके सैलानियों के वाहनों का पीछा कर उन्हें अपने रिसोट्र्स में चलने के लिए कई बार मजबूर कर देते हैं। पिछले अर्से पुलिस ने ऑपरेशन वेलकम के तहत उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाइयां भी की थी। लपकों के कारण जैसलमेर का पर्यटन इतना बदनाम हो रहा है कि दुनिया भर के सैलानियों के बीच लोकप्रिय गाइड बुक्स में उनका विस्तार से वर्णन किया गया है।
थम नहीं रही ऑनलाइन ठगी
जैसलमेर में होटलों तथा रिसोट्र्स के नाम पर ऑनलाइन ठगी का चलन पिछले चंद सालों से काफी बढ़ गया है। इसके तहत कुछ लोग अपने होटल-रिसोर्ट की वेबसाइट पर अन्य स्थानों के फोटो आदि दर्शाकर सैलानियों को भ्रमित करने में कामयाब हो जाते हैं। वे उनसे अग्रिम राषि भी ऐंठ लेते हैं। जब सैलानी संबंधित स्थल पर पहुंचते हैं तब कई बार उनके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। ऐसे मामले पुलिस की चौखट पर पहुंचने के बावजूद कोई बड़ी कार्रवाई ऐसा करने वालों के खिलाफ नहीं हो पाई है।
5 की चीज के 50 नहीं 500
जैसलमेर में पर्यटन से जुड़े कईलोग नकली माल को असली बता कर सैलानियों से कई गुना अधिक राशि वसूलने की कहानियां भी सामने आती रहती हैं। इसमें दुकानदार, गाइड आदि की मिलीभगत रहती है। नकली सामान को कमीशन के खेल में सैकड़ों-हजारों में बेच दी जाती है। सैलानी को जब उस वस्तु की वास्तविकता पता चलती है तो वह स्वयं को ठगा महसूस करता है। इससे जैसलमेर के पर्यटन व्यवसाय की नकारात्मक छवि बन रही है।





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